उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण सिंडिकेट का बड़ा खुलासा
उत्तर प्रदेश के आगरा से शुरू हुए धर्मांतरण और फंडिंग नेटवर्क का मामला अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। पुलिस ने इस संदिग्ध सिंडिकेट के मुख्य आरोपी और उसके वित्तपोषक दाऊद अहमद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी संपत्तियों को जब्त कर लिया है। इस कार्रवाई के तहत आगरा पुलिस ने भोपाल (Bhopal) के गांधीनगर थाना क्षेत्र में स्थित रिलायबल हाईटेक सिटी में दाऊद अहमद के घर पर छापा मारा और संपत्ति कुर्क की। इससे पहले नोटिस जारी कर उसकी संपत्ति का विवरण मांगा गया था, लेकिन अदालत में पेश न होने पर अब उसकी संपत्ति जब्त कर ली गई है। इस पूरे मामले में इंटरनेशनल कनेक्शन और फंडिंग नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई है।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और फंडिंग का खुलासा
आगरा पुलिस की जांच में पता चला है कि दाऊद अहमद पिछले तीन वर्षों से कनाडा (Canada) में मौजूद है और उसकी गतिविधियों का संबंध ब्राम्पटन इस्लामिक सेंटर (Brampton Islamic Centre) से भी जुड़ा हुआ है। पुलिस का मानना है कि इस सिंडिकेट को विदेशी फंडिंग मिल रही थी, जिसमें कनाडा और यूएई (UAE) से प्राप्त धनराशि शामिल है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि इन फंडिंग का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जा रहा था और क्या इसके माध्यम से कोई संगठित नेटवर्क देश के अंदर संचालित हो रहा था। दाऊद अहमद को भारत लाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने गृह विभाग से पत्राचार किया है, ताकि इंटरपोल (Interpol) के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया जा सके। साथ ही म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) के तहत भी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
धमकी और गिरफ्तारी की कोशिशें जारी
पुलिस का उद्देश्य स्पष्ट है कि आरोपी या उसका परिवार अब अपनी संपत्तियों को बेचकर फरार न हो सके। इस संदर्भ में, पुलिस ने भोपाल में भी दबिश दी, लेकिन दाऊद अहमद को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। अदालत के आदेश के बावजूद वह पेश नहीं हुआ, जिसके कारण उसकी संपत्तियों को कुर्क किया गया है। सूत्रों के अनुसार, दाऊद अहमद को भारत लाने के लिए इंटरपोल और उत्तर प्रदेश पुलिस मिलकर प्रयास कर रहे हैं। इस मामले में अब तक 14 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें गिरोह का मास्टरमाइंड दिल्ली में और उसकी सहयोगी गोवा से संचालित थी। पुलिस ने इस नेटवर्क के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए कई लड़कियों को भी गिरोह के चंगुल से मुक्त कराया है। इस पूरे ऑपरेशन के बाद, आगरा पुलिस का मानना है कि यह मामला अब इंटरनेशनल फंडिंग और नेटवर्क का बड़ा खुलासा बन चुका है, और आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।











