दिल्ली की राजनीति में बड़ा बदलाव: आम आदमी पार्टी से नेताओं का पलायन
दिल्ली की राजनीतिक परिदृश्य में आज एक महत्वपूर्ण घटना हुई है, जिसने सभी को चौंका दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के संसदीय दल में भारी टूट की खबर सामने आई है। पार्टी के संस्थापक सदस्य और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने पद से इस्तीफा देकर पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही कई अन्य सांसद भी इस टूट का हिस्सा बन गए हैं।
राघव चड्ढा का पार्टी छोड़ने का कारण और बयान
राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मैंने अपने खून-पसीने से इस पार्टी का निर्माण किया और 15 वर्षों तक अपनी ऊर्जा दी। अब पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से भटक चुकी है। यह अब देश के हित में नहीं, बल्कि अपने स्वार्थों के लिए काम कर रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने साथी सांसदों के साथ मिलकर भारत के संविधान का प्रयोग करते हुए खुद को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलीन कर लेंगे।
संसदीय ताकत में आई गिरावट और राजनीतिक प्रभाव
आम आदमी पार्टी के पास पहले राज्यसभा में कुल 10 सांसद थे, जिनमें से सात पंजाब से और तीन दिल्ली से थे। लेकिन आज की घटना ने पार्टी को बड़ा झटका दिया है, जब तीन प्रमुख सांसद—राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल—ने अपने पद छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। इन सांसदों ने अपने इस्तीफे के साथ ही दावा किया है कि अब पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसद उनके साथ हैं।
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इससे पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान स्वाति मालीवाल भी पार्टी छोड़ चुकी हैं। इन नेताओं के जाने से अरविंद केजरीवाल की राज्यसभा में ताकत आधी से भी कम रह गई है। इस टूट ने आम आदमी पार्टी की संगठनात्मक एकता और भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस टूट का मुख्य कारण दिल्ली चुनाव में पार्टी की हार को माना जा रहा है। चुनाव के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संदीप पाठक को हाशिए पर डाल दिया था। चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में पाठक को महत्वपूर्ण निर्णय लेने से दूर कर दिया गया। संदीप पाठक 2022 के पंजाब चुनाव अभियान के दौरान पार्टी की रणनीति का मुख्य हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्हें सीमित कर दिया गया। वहीं, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, आतिशी, गोपाल राय और दुर्गेश पाठक जैसे नेताओं को विभिन्न राज्यों की जिम्मेदारी दी गई।










