पेंच टाइगर रिजर्व में युवक की मौत का खुलासा
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में स्थित पेंच टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में युवक की हत्या या बाघ के हमले की आशंका को लेकर शुरू में कई सवाल उठ रहे थे। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की मौत जंगली जानवर के हमले से ही हुई है, जिससे घटनाक्रम का सही रूप स्पष्ट हो गया है।
मामले का विस्तृत खुलासा और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट
14 अप्रैल को छिंदवाड़ा (Chhindwara) जिले के गुमतरा रेंज में गश्ती दल को एक युवक का शव मिला था, जिसमें उसका सिर धड़ से अलग था। प्रारंभिक जांच में यह माना जा रहा था कि बाघ ने ही इस घटना को अंजाम दिया है, क्योंकि वन विभाग के अधिकारी भी इस बात को लेकर आशंकित थे कि क्या बाघ इस तरह का हमला कर सकता है। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर बाघ गर्दन पर हमला कर शिकार को अधमरा करता है, लेकिन इस मामले में सिर पूरी तरह से अलग पाया गया, जिससे फॉरेंसिक जांच जरूरी हो गई।
डॉक्टर रजत लोधी ने भी इस बात की पुष्टि की कि युवक की मौत बाघ के हमले से ही हुई है। फील्ड स्टाफ की जांच में भी यही निष्कर्ष निकला कि घटना बाघ के हमले का परिणाम है। मृतक की पहचान 30 वर्षीय दिनेश सेवतकर के रूप में हुई है, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ था। शव जलस्रोत के पास मिला था, और संभावना है कि बाघ पानी पीने आया था और युवक पर हमला कर दिया।
सुरक्षा और मुआवजे की प्रक्रिया
पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल ने बताया कि घटना स्थल पर पहुंचे फील्ड स्टाफ ने खून के निशान देखे थे, और करीब 150 मीटर दूर युवक का शव मिला, जिसमें सिर धड़ से अलग था। घटना के बाद मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, हालांकि नियमों के अनुसार कोर एरिया में हुई घटनाओं पर मुआवजा नहीं दिया जाता।
इस घटना ने एक बार फिर कोर क्षेत्र में प्रवेश के खतरों और वन्यजीवन सुरक्षा नियमों का पालन करने की आवश्यकता को उजागर किया है। यह घटना यह भी दर्शाती है कि जंगली जानवरों के साथ मानवीय संपर्क कितने खतरनाक हो सकते हैं, और वन विभाग को सतर्क रहने की जरूरत है।










