बिहार में नई सरकार का गठन: सियासी बदलाव का संकेत
बिहार में हाल ही में नई सरकार का गठन हुआ है, जिसमें सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। साथ ही जेडीयू के विजय चौधरी और विजेंद्र यादव ने डिप्टीसीएम के रूप में शपथ ग्रहण की। यह पहली बार है जब बिहार में बीजेपी ने ऐसा नेता मुख्यमंत्री बनाया है, जिनका राजनीतिक बैकग्राउंड संघ या बीजेपी का नहीं है।
सियासी यात्रा और राजनीतिक बदलाव
सम्राट चौधरी ने अपनी राजनीतिक शुरुआत आरजेडी (RJD) से की थी, फिर जेडीयू (JDU) में शामिल हुए और अंत में बीजेपी (BJP) में आए। बीजेपी में उनके आठ साल ही हुए हैं, लेकिन इस छोटी अवधि में ही उन्होंने बिहार की राजनीति में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। यह भी उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने अब तक नौ ऐसे मुख्यमंत्रियों को पद पर बैठाया है, जिनकी शुरुआत कांग्रेस या अन्य दलों से हुई थी। बीजेपी में शामिल होने के बाद इन नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है, और उन्हें पार्टी ने उच्च पदों पर स्थापित किया है।
अन्य राज्यों में सियासी बदलाव और नए चेहरे
असम (Assam) में भी बीजेपी ने ऐसे नेताओं को मुख्यमंत्री पद पर बैठाया है, जिनका राजनीतिक बैकग्राउंड पार्टी का नहीं है। हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस से शुरुआत की थी, फिर बीजेपी में शामिल होकर मुख्यमंत्री बने। इसी तरह मणिपुर (Manipur) में एन बीरेन सिंह और युमनाम खेमचंद सिंह ने भी पार्टी में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री पद संभाला। अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) में पेमा खांडू ने कांग्रेस से शुरुआत की, लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल होकर तीन बार मुख्यमंत्री पद पर रहे। त्रिपुरा (Tripura) में भी कांग्रेस से आए माणिक साहा ने बीजेपी की सरकार बनाई। कर्नाटक (Karnataka) में बसवराज बोम्मई ने जनता दल से शुरुआत की, फिर बीजेपी में शामिल होकर मुख्यमंत्री बने। झारखंड (Jharkhand) में अर्जुन मुंडा जैसे नेता भी पार्टी में शामिल होकर मुख्यमंत्री पद पर पहुंचे। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि बीजेपी अब ऐसे नेताओं को भी मौका दे रही है, जिनका सियासी बैकग्राउंड पार्टी का नहीं है, ताकि पार्टी का विस्तार और सियासी प्रभाव मजबूत हो सके।










