मध्य प्रदेश में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का बड़ा खुलासा
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के रामगढ़ गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा एक गंभीर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। यहां स्वास्थ्य विभाग के कंप्यूटर डाटा एंट्री ऑपरेटर की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर नकली जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए। आश्चर्य की बात यह है कि फरवरी महीने में इस छोटे से स्वास्थ्य केंद्र पर 137 बच्चों का जन्म रजिस्टर किया गया, जबकि हकीकत में वहां एक भी डिलीवरी नहीं हुई थी।
फर्जीवाड़े का खुलासा और पुरानी फर्जी प्रमाण पत्र की बात
यह मामला तब सामने आया जब ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को इसकी जानकारी मिली। इसके तुरंत बाद फरवरी में ही संबंधित ऑपरेटर को हटा दिया गया। जांच के दौरान यह भी पता चला कि केवल एक महीने ही नहीं, बल्कि 1950 से 1980 के बीच के भी फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए, जबकि उस समय उस गांव में न तो स्वास्थ्य केंद्र था और न ही कोई डिलीवरी होती थी। इस पूरे मामले का पर्दाफाश 6 अप्रैल को माचलपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद हुआ।
आरोपियों की भूमिका और फर्जी प्रमाण पत्र की विस्तृत जांच
जांच में यह भी पता चला कि राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के नाम पर भी फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए गए। कुल मिलाकर 250 से अधिक नकली जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए। पुलिस ने यह भी पाया कि आरोपी आधार कार्ड में नाम और जन्मतिथि में संशोधन कराने के लिए ये फर्जी प्रमाण पत्र बनाते थे। इसके लिए लोकसेवा केंद्र, आधार सेंटर और एमपी ऑनलाइन के माध्यम से लोगों को जोड़ा जाता था। प्रति प्रमाण पत्र 500 से 1000 रुपये लेकर बिना किसी वैध दस्तावेज के सीआरएस पोर्टल पर एंट्री कर प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते थे।
आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने करीब 250 फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर लगभग 35 हजार रुपये अवैध रूप से कमाए हैं। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी अर्जुन बैरागी समेत कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एएसपी केएल बंजारे ने बुधवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि 6 अप्रैल को डॉ. सुनील चौरसिया और बीएमओ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जीरापुर की शिकायत पर थाना माचलपुर में मामला दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी अर्जुन बैरागी ने फरवरी 2026 में बिना किसी डिलीवरी के 137 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए। कई प्रमाण पत्र बिना आवेदन के, पुराने वर्षों के और विभिन्न राज्यों के नाम पर बनाए गए। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और कंप्यूटर सिस्टम जब्त कर लिए हैं। साथ ही आम जनता से अपील की है कि फर्जी दस्तावेज बनाना या बनवाना गंभीर अपराध है, इसलिए वैध प्रक्रिया का ही पालन करें।











