बिहार में नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ने का निर्णय तय
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पद से इस्तीफा देने की तारीख अब स्पष्ट हो चुकी है। वे गुरुवार को दिल्ली पहुंचकर राज्यसभा सदस्यता की शपथ लेंगे। इसके बाद शुक्रवार को वे सांसद पद की शपथ ग्रहण करेंगे और जैसे ही पटना लौटेंगे, अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। बिहार की राजनीतिक परंपरा में पहली बार ऐसा हो रहा है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने नए मुख्यमंत्री का चयन करने जा रही है, जिसमें सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।
नीतीश कुमार का दिल्ली में राजनीतिक कदम और आगामी प्रक्रिया
दो दशक से अधिक समय तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार अब दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति में अपनी नई भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं। वे गुरुवार को दोपहर पटना से रवाना होकर 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्यता की शपथ लेंगे। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। पटना में 14 अप्रैल को ही एनडीए (NDA) विधायक दल की बैठक बुलाई गई है, जिसमें माना जा रहा है कि वे अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर सकते हैं।
राजनीतिक समीकरण और नई सरकार का गठन
बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया करीब 2005 के बाद पहली बार इतनी तेज हो रही है। नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनते ही, उनके करीबी जेडीयू नेता विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की सत्ता अब भाजपा (BJP) के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगी। 10 अप्रैल को दिल्ली में बिहार बीजेपी नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हो सकते हैं। इस बैठक में सरकार गठन की प्रक्रिया पर चर्चा होने की संभावना है।
नीतीश कुमार 14 अप्रैल को दिल्ली से बिहार लौटकर अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद 15 अप्रैल को नई सरकार का गठन होने की संभावना है। पटना लौटने के बाद वे अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और एनडीए (NDA) विधायक दल की बैठक में पद छोड़ने का निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि इस बैठक में सम्राट चौधरी का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए तय हो सकता है।
बिहार में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति की भी संभावना है। 10 अप्रैल को दिल्ली में होने वाली बीजेपी नेताओं की बैठक में बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में बिहार की राजनीति का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।










