आयुष की कहानी में नए खुलासे और सवाल
मजबूरी में किडनी बेचने का दावा कर सुर्खियों में आए आयुष की कहानी अब नई जानकारियों के सामने आने के बाद उलट-पलट हो रही है। जहां पहले यह माना जा रहा था कि वह आर्थिक तंगी और पारिवारिक दबाव के कारण मजबूर था, वहीं अब गांव के लोगों और परिवार से मिली जानकारी ने इस धारणा को खारिज कर दिया है। इस नई जानकारी ने आयुष की कथित मजबूरी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आयुष का पारिवारिक और शैक्षिक इतिहास
आयुष बेगूसराय (Begusarai) जिले के भगवानपुर प्रखंड के औगान (Augan) गांव का निवासी है। उसके परिवार को पहले अच्छी स्थिति में माना जाता था। उसके पिता राजेश चौधरी (Rajesh Choudhary) जमीनदार थे, जो अपने दोनों बेटों को अच्छी शिक्षा दिलाने का सपना देखते थे। 2015 में जब आयुष ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की, तो परिवार की उम्मीदें और भी बढ़ गईं। पिता ने उसे डॉक्टर बनाने का सपना देखा और विशाखापट्टनम (Visakhapatnam) के एक कोचिंग संस्थान में दाखिला दिलाया।
गांव में फैली कहानी और नई सच्चाई
पढ़ाई के दौरान ही आयुष का ध्यान भटकने लगा। वह दोस्तों और निजी जिंदगी में उलझता गया, और इसी बीच उसकी मुलाकात एक लड़की से हुई। धीरे-धीरे यह रिश्ता प्रेम में बदल गया। गांव के लोग बताते हैं कि इसके बाद आयुष का पढ़ाई से ध्यान पूरी तरह हट गया और वह बार-बार घर लौटने लगा। 2017 में पिता की आत्महत्या ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। लेकिन गांव के लोगों का कहना है कि यह घटना आयुष की जिंदगी में एक मोड़ जरूर बनी, पर उसकी दिशा वैसी नहीं थी जैसी उम्मीद की जाती थी। पिता के निधन के बाद जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ने के बजाय, आयुष और अधिक बेपरवाह हो गया।









