मध्य प्रदेश के खेल प्रेमी का अद्भुत समर्पण और प्रेरणादायक कहानी
खेल के प्रति गहरा लगाव और समर्पण का यह उदाहरण शायद ही कहीं देखने को मिले। मध्य प्रदेश पुलिस की 7वीं वाहिनी में पिछले 16 वर्षों से कांस्टेबल के पद पर कार्यरत परम आशावर ने यह साबित कर दिया है कि यदि दृष्टि स्पष्ट हो, तो आर्थिक कठिनाइयां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। उन्होंने न केवल मध्य प्रदेश की महिला फुटबॉल लीग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि अपनी व्यक्तिगत संपत्ति दांव पर लगाकर गांव की बेटियों को राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाने का सपना भी साकार किया।
संकट के बावजूद टीम को भेजने का अद्भुत प्रयास
टूर्नामेंट में भाग लेने और टीम की तैयारी के लिए वित्तीय संसाधनों की भारी कमी थी। इस चुनौती का सामना करने के लिए परम ने हार नहीं मानी और अपने व्यक्तिगत लोन के रूप में दस लाख रुपये का ऋण लिया। जब यह रकम भी कम पड़ गई, तो उन्होंने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर दो लाख रुपये और जुटाए। इस तरह कुल चौदह लाख रुपये खर्च कर उन्होंने अपनी टीम को बेंगलुरू भेजा, ताकि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का प्रदर्शन जारी रह सके।
गांव की बेटियों को राष्ट्रीय मंच पर लाने का मिशन
परम का विजन स्पष्ट है कि ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाशाली बेटियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। उन्होंने खुद विभिन्न राज्यों का दौरा कर ट्रायल लिए और रायसेन डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल क्लब (DRFC) के माध्यम से 30 में से 22 खिलाड़ियों का चयन किया। खास बात यह है कि उन्होंने किसी भी खिलाड़ी से प्रशिक्षण, किट, रहने और खाने का शुल्क नहीं लिया। अपने संसाधनों से ही इन बेटियों की पूरी देखभाल की। इस टीम ने बेंगलुरु में आयोजित इंडियन वीमेंस लीग (टियर-2) में शानदार प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने ओडिशा और रूट्स जैसी मजबूत टीमों को हराकर मध्य प्रदेश का नाम ऊंचा किया। इस सफलता के पीछे परम का दृढ़ संकल्प और ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने का जुनून ही है।









