दिल्ली में सरकारी आवासों पर फिजूलखर्ची का आरोप
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय लेखा परीक्षा संस्थान (कैग) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर सरकारी आवास के नवीनीकरण में अनावश्यक खर्च और धन के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) से जांच कराने की मांग की है।
आवास की विलासिता और खर्च का खुलासा
रेखा गुप्ता ने इस बंगले में मौजूद अत्यधिक विलासितापूर्ण सुविधाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस सरकारी बंगले में लगभग 50 एयर कंडीशनर, 70 पंखे, ₹7 लाख की लिफ्ट, ₹18 लाख की कॉफी मशीन और सेंट्रलाइज्ड क्लाइमेट कंट्रोल सिस्टम जैसी सुविधाएं हैं। उन्होंने पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा के साथ इस विवादित बंगले का निरीक्षण किया और कहा कि यह बंगला सामान्य घरों से कहीं अधिक भव्य है।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के आवास को लेकर उठे विवाद का भी जिक्र किया और कहा कि जिन लोग 10 एयर कंडीशनर पर सवाल उठा रहे थे, वे खुद पांच गुना अधिक सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने अरविंद केजरीवाल और अन्य आम आदमी पार्टी (AAP) नेताओं जैसे मनीष सिसोदिया, राखी बिड़ला, राम निवास, सौरभ भारद्वाज और आतिशी के सरकारी आवासों के नवीनीकरण पर खर्च का भी उल्लेख किया।
कोरोना काल में खर्च और राजनीतिक आरोप
रेखा गुप्ता ने इस पूरे प्रकरण को कोरोना महामारी के समय से जोड़ते हुए कहा कि जब जनता को ऑक्सीजन और इलाज की जरूरत थी, तब ये नेता अपने आलीशान घर बना रहे थे। उन्होंने जांच की मांग करते हुए कहा कि इस मामले को तुरंत पब्लिक अकाउंट्स कमेटी को भेजा जाना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
वहीं, दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा ने भी आम आदमी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने सत्ता में आने पर सादगी का वादा किया था, लेकिन बाद में अपने लिए महंगा बंगला बनवाया। वर्मा ने यह भी कहा कि केजरीवाल के ‘शीशमहल’ प्रोजेक्ट की लागत ₹7.5 करोड़ से बढ़कर ₹60 करोड़ तक पहुंच गई, और इसके लिए कई पेड़ भी काटे गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि कोरोना फंड का सही उपयोग किया गया होता, तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती थी।











