बिहार बोर्ड ने पहली बार पूरे देश में सबसे पहले इंटरमीडिएट का परिणाम घोषित किया
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने एक बार फिर अपनी तेज़ी और दक्षता का परिचय देते हुए पूरे भारत में सबसे पहले इंटरमीडिएट का रिजल्ट जारी किया है। यह लगातार आठवीं बार है जब बिहार बोर्ड ने देश में सबसे पहले परीक्षा परिणाम का प्रकाशन किया है। मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, तो सबसे प्रमुख बात यह सामने आई कि बिहार की छात्राएँ अपने प्रदर्शन में अव्वल रहीं।
85.19 प्रतिशत छात्रों ने परीक्षा में सफलता हासिल की
इस वर्ष बिहार बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में कुल 85.19 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने सफलता प्राप्त की है। बोर्ड की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि परीक्षा के मूल्यांकन का कार्य महज 25 दिनों के भीतर पूरा कर लिया गया। इस सफलता का श्रेय बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर और उनकी टीम की तत्परता, तकनीक का कुशल उपयोग और पारदर्शी परीक्षा संचालन को जाता है, जिसने इस तेज़ी से परिणाम तैयार करने में मदद की।
महिला सशक्तिकरण का प्रभाव और टॉपर्स का प्रदर्शन
रिजल्ट में महिलाओं का दबदबा स्पष्ट रूप से देखा गया है। जहां कुल पास प्रतिशत 84.09 प्रतिशत रहा, वहीं छात्राओं का पास प्रतिशत 86.23 प्रतिशत रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों का परिणाम इस सफलता में झलकता है। साइंस स्ट्रीम में आदित्य प्रकाश, आर्ट्स में साक्षी कुमारी और कॉमर्स में गया की अदिति कुमारी ने टॉप किया है।
कुल मिलाकर, तीनों संकायों में मिलाकर 26 टॉपर्स हैं, जिनमें से 19 छात्राएँ हैं। यह दर्शाता है कि बिहार की बेटियाँ अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। आर्ट्स और कॉमर्स दोनों में छात्राएँ प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहीं, जबकि साइंस में एक छात्र ने पहले स्थान पर कब्जा किया।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि समय पर परिणाम जारी करने का मुख्य उद्देश्य छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना है। सही समय पर नतीजे आने से छात्र देश और विदेश के विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए समय से आवेदन कर सकते हैं। जो छात्र सफल नहीं हो सके हैं, उनके लिए जल्द ही विशेष परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा, ताकि वे अपनी योग्यता साबित कर सकें।











