JNU में गैस की कमी का छात्रों पर प्रभाव
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में LPG की आपूर्ति में आई कमी का असर अब कैंपस की कैफेटेरिया और हॉस्टल मेस पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। गैस की सीमित उपलब्धता के कारण कई स्थानों पर भोजन के मेनू में बदलाव करना पड़ा है, जिससे छात्र चिंतित हो गए हैं। विश्वविद्यालय छात्र संघ ने सोमवार को घोषणा की कि इस मुद्दे को लेकर छात्रों का एक मार्च निकाला जाएगा।
यह मार्च छात्रों के डीन कार्यालय तक जाएगा, जिसमें मेस और ढाबों के सुचारू संचालन के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की जाएगी। छात्र संघ का कहना है कि गैस की आपूर्ति में कमी के कारण कैंपस की कई कैफेटेरिया और मेस के मेनू पर लगातार असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, मेनू में कटौती की जा रही है, जिससे छात्रों को परेशानी हो रही है।
गैस आपूर्ति में कटौती का विस्तृत प्रभाव
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (Indraprasth Gas Limited) ने साबरमती और लोहित हॉस्टल के मेस प्रमुखों को अलग-अलग पत्र भेजकर सूचित किया है कि सभी औद्योगिक और व्यावसायिक ग्राहकों को गैस की आपूर्ति पिछले छह महीनों की औसत खपत का केवल 80 प्रतिशत ही दी जाएगी। यह व्यवस्था 11 मार्च 2026 से लागू कर दी गई है।
गैस की 20 प्रतिशत कटौती का सीधा असर हॉस्टल के मेस पर पड़ा है। लोहित हॉस्टल के नए मेनू में स्पष्ट रूप से लिखा है कि कुछ खास दिनों में रोटी और पूरी उपलब्ध नहीं होंगी। मंगलवार और शनिवार के दोपहर के भोजन में रोटी की जगह चावल या खिचड़ी जैसे विकल्प दिए जाएंगे।
भविष्य में संभावित बदलाव और छात्रों की चिंता
दिशा छात्र संगठन ने चेतावनी दी है कि आने वाले संकट के कारण कई कैंटीनों ने पहले ही कुछ खाद्य पदार्थों को मेनू से हटा दिया है। उदाहरण के तौर पर, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज की कैंटीन में अब समोसे नहीं परोसे जा रहे हैं और कुछ जगहों पर चाय भी उपलब्ध नहीं है।
एक छात्र ने बताया कि यदि यह संकट जारी रहा, तो आने वाले दिनों में मेस के मेनू में और बदलाव हो सकते हैं और खाने की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। खासकर उन छात्रों के लिए जो सीमित संसाधनों के साथ पढ़ रहे हैं, यह स्थिति बहुत कठिनाई पैदा कर सकती है। हालांकि, छात्र ने यह भी कहा कि अभी मेनू में किए गए बदलाव बहुत बड़ी समस्या नहीं हैं, लेकिन चिंता और आशंका जरूर बढ़ रही है।
छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया है कि मेस और ढाबों की सुविधाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं, ताकि छात्रों को किसी तरह की असुविधा न हो।









