दिल्ली शराब घोटाले का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
दिल्ली में हुए शराब घोटाले के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है, जब अरविंद केजरीवाल ने इस विवादित मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने का फैसला किया है। केजरीवाल ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई कर रही दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्णकांता शर्मा को बदलने की मांग की है। इस मामले में सीबीआई ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
हाई कोर्ट का फैसला और केजरीवाल की याचिका का कारण
दिल्ली हाई कोर्ट ने जज बदलने की अरविंद केजरीवाल की मांग को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यह मामला मौजूदा रोस्टर के अनुसार जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ को सौंपा गया है और यदि किसी जज को इस मामले से अलग होना है, तो वह स्वयं निर्णय लेगा। अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासनिक स्तर पर इस याचिका को दूसरी बेंच को स्थानांतरित करने का कोई कारण नहीं है। इसके बाद, केजरीवाल ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अपनी याचिका में आशंका जताई है कि इस पीठ के समक्ष मामले की निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं होगी।
मामले का इतिहास और आरोप-प्रत्यारोप
केजरीवाल का कहना है कि यह अपील किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि निष्पक्ष न्याय की उम्मीद के आधार पर की गई है। उल्लेखनीय है कि निचली अदालत ने 27 फरवरी को इस मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था। अदालत ने कहा था कि जांच एजेंसी के आरोप मुख्य रूप से सह-आरोपियों और गवाहों के बयानों पर आधारित हैं, और कोई स्वतंत्र सबूत नहीं है जो आपराधिक साजिश को साबित कर सके। इसके बाद सीबीआई ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 9 मार्च को सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण प्रतीत होती हैं और इन पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। यह मामला 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसे बाद में अरविंद केजरीवाल की सरकार ने अनियमितताओं के आरोपों के बीच वापस ले लिया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस नीति के माध्यम से निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जबकि बचाव पक्ष का तर्क है कि आरोपों का समर्थन करने वाले कोई ठोस सबूत नहीं हैं।










