बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की मौतें और संरक्षण चुनौतियां
मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से संबंधित एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट हाई कोर्ट में प्रस्तुत की गई है, जिसने राज्य के वन्यजीव संरक्षण के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के नवंबर से फरवरी 2026 के बीच इस क्षेत्र में कुल आठ बाघों की मृत्यु हो चुकी है।
मृत्यु के कारण और स्थिति का विश्लेषण
रिपोर्ट में बताया गया है कि रिजर्व के भीतर चार बाघों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है, जबकि शेष चार बाघों की मौत सामान्य वन क्षेत्र में बिजली के झटके से हुई। यह भी उल्लेख किया गया है कि सभी मृत बाघों के शव पूरी तरह सुरक्षित थे। मृतकों को दो भागों में बांटा गया है: एक में चार बाघों की मौत रिजर्व के अंदर हुई, जिनमें दो आपसी लड़ाई में मारे गए, एक बीमारी से और एक कुएं में डूबने से। दूसरी ओर, चार मौतें सामान्य वन क्षेत्र में हुईं, जिनमें सभी करंट लगने से हुई हैं।
संबंधित खबरें और संरक्षण की स्थिति
मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या 785 है, जबकि पूरे भारत में यह आंकड़ा 3,167 का है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2025 में कुल 54 बाघों की मौत हुई, जो प्रोजेक्ट टाइगर के शुरू होने के बाद से सबसे अधिक है। जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में ही छह बाघों की मौत की खबरें सामने आई हैं।
वहीं, वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने याचिका दायर कर राज्य सरकार और वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शिकारी खुलेआम बिजली के तारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, और विभाग का सर्विलांस सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है। याचिका में यह भी आरोप है कि अधिकारी संदिग्ध मौतों को अक्सर टेरिटोरियल फाइट का नाम देकर टालमटोल कर देते हैं।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि वन विभाग ने बिजली विभाग को कई बार पत्र लिखकर संवेदनशील इलाकों में बिजली की लाइनों को मजबूत करने और वाइल्डलाइफ स्टैंडर्ड का पालन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है, ताकि करंट लगने की घटनाओं को रोका जा सके।











