गुना में अभ्युदय जैन मौत मामला: हाईकोर्ट का फैसला और राहत
गुना जिले में अभ्युदय जैन की मौत से जुड़े सनसनीखेज मामले में अंततः मुख्य आरोपी मां अलका जैन को न्याय मिला है। ग्वालियर हाईकोर्ट की बेंच ने इस हाईप्रोफाइल केस पर सुनवाई करते हुए 19 पन्नों का फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि बिना पर्याप्त सबूत के केवल संदेह के आधार पर आपराधिक कार्रवाई जारी रखना कानून का उल्लंघन है। एक साल के बाद ही हाईकोर्ट ने FIR और पूरे प्रकरण को रद्द कर दिया है। 14 फरवरी 2025 को हुई अभ्युदय जैन की मौत के बाद, मां अलका जैन को बेटे की मौत का जिम्मेदार माना गया था। उन्हें 98 दिनों तक जेल में रहना पड़ा, और इस दौरान वह पूरी तरह टूट गई थीं।
मामले की जांच और हाईकोर्ट का निर्णय
14 फरवरी 2025 को 15 वर्षीय अभ्युदय का शव घर के वॉशरूम में पाया गया था। मां के अनुसार, उसका शव फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। पुलिस ने शव को बरामद कर मर्ग कायम किया और जांच शुरू की। 8 मार्च को पुलिस ने मां अलका जैन को बेटे की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। इस घटना से आहत पिता ने पुलिस मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद, ग्वालियर के IG ने विशेष टीम का गठन किया, जिसमें DSP अवनीत शर्मा की मुख्य भूमिका थी। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज से मेडिको-लीगल रिपोर्ट ली गई, जिसने कहानी को बदल दिया।
हाईकोर्ट का फैसला और आरोपी की निर्दोषता
गांधी मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से अलका जैन की गलती नहीं निकली। SIT की जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर, ग्वालियर ट्रायल कोर्ट ने 12 संदेहास्पद बिंदुओं को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने इन सभी बिंदुओं का विश्लेषण किया और कहा कि अंतिम बार देखने का सिद्धांत, घर में मौजूदगी, फांसी की संभावना, चाबी का प्रयोग, रिश्तेदारों का स्कूल जाना, फटे हुए पन्ने, पढ़ाई में गिरावट, कॉल डिटेल, CCTV, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आदि सभी बिंदुओं पर संदेह सही नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि इन परिस्थितियों से हत्या का प्रमाण नहीं मिलता। अंततः, हाईकोर्ट ने पूरे प्रकरण को निरस्त कर मां को निर्दोष घोषित किया।











