हरियाणा के सरकारी खातों में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया
हरियाणा सरकार के वित्तीय संसाधनों को प्रभावित करने वाले लगभग 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में बैंक के दो पूर्व कर्मचारियों के साथ ही दो अन्य व्यक्तियों को भी हिरासत में लिया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और उनके संबंध
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रिभव ऋषि, अभय, स्वाति सिंगला और उनके भाई अभिषेक सिंगला शामिल हैं। रिभव ऋषि और अभय दोनों ही बैंक के पूर्व कर्मचारी हैं, जबकि स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला एक कंपनी चलाते थे, जिसका नाम है स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स। दिलचस्प बात यह है कि अभय, स्वाति सिंगला का पति है।
जांच की शुरुआत और मुख्य साजिश का खुलासा
हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो के प्रमुख ए.एस. चावला ने बताया कि 23 फरवरी को मुख्य सचिव (विजिलेंस) से प्राप्त पत्र के आधार पर, जिसमें पंचायत विभाग की जांच का जिक्र था, हमने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। अभी तक इस घोटाले में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
आरोपियों में से दो मुख्य आरोपी रिभव ऋषि और अभय को मंगलवार शाम गिरफ्तार किया गया। रिभव पंचकूला का निवासी है और छह महीने पहले बैंक की सेक्टर-32 शाखा से अपनी नौकरी छोड़ चुका है। अभय भी बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत था।
जांच में पता चला है कि एक प्रमुख कंपनी के खाते में 300 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे, जिसकी मालकिन स्वाति सिंगला और उसका भाई अभिषेक सिंगला हैं। यह राशि स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स के खाते में गई थी और बाद में विभिन्न खातों में ट्रांसफर की गई। कुछ धनराशि एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) में भी भेजी गई।
स्वाति सिंगला के पास कंपनी के 75 प्रतिशत शेयर हैं, जबकि अभिषेक सिंगला के पास 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अधिकारी ने बताया कि इस पूरे मनी ट्रेल की जांच की जा रही है, जिसमें धन के लेन-देन की जटिल श्रृंखला शामिल है। इस प्रक्रिया में समय लगेगा और जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।
पुलिस ने कहा कि हरियाणा सरकार के किसी भी अधिकारी की संलिप्तता की अभी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच जारी है। मोडस ऑपरेंडी का भी अध्ययन किया जा रहा है, और जांच में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की भी मदद ली जा रही है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
घोटाले का खुलासा कैसे हुआ और कार्रवाई की दिशा
यह घोटाला तब उजागर हुआ जब आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने अपनी एक फाइलिंग में खुलासा किया कि उसकी चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में अनधिकृत और धोखाधड़ी गतिविधियों का पता चला है। जब एक सरकारी विभाग ने अपने खाते को बंद कर धनराशि दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया, तो गड़बड़ी का पर्दाफाश हुआ।
बैंक ने पाया कि हरियाणा सरकार की राशि और बैंक सिस्टम में दर्ज बैलेंस के बीच अंतर था। जांच में यह भी पता चला कि कई अन्य सरकारी खातों में भी इसी तरह की विसंगतियां पाई गई हैं। इस पूरे मामले में लगभग 590 करोड़ रुपये की हेराफेरी का अनुमान लगाया गया है।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने मंगलवार को विधानसभा में घोषणा की कि हरियाणा सरकार की पूरी 556 करोड़ रुपये की राशि वापस मिल चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया था, क्योंकि उसके फरार होने का खतरा था।
अंत में, एंटी करप्शन ब्यूरो ने बताया कि बैंक प्रबंधन ने हरियाणा सरकार की पूरी राशि वापस कर दी है, और जांच जारी है ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।











