बिहार में राज्यसभा चुनाव का सियासी समीकरण बदल रहा है
16 मार्च को होने वाले बिहार के पांच राज्यसभा सीटों के चुनाव इस बार काफी दिलचस्प और जटिल हो गए हैं। राज्य में आगामी अप्रैल में खाली होने वाली इन सीटों पर वर्तमान में तीन सीटें एनडीए (NDA) के पास हैं, जबकि दो सीटें आरजेडी (RJD) के कब्जे में हैं। विधानसभा चुनाव के परिणामों ने इस सियासी खेल को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है, जिससे राजनीतिक दलों की रणनीतियों में नई दिशा देखने को मिल रही है।
राज्यसभा की सीटों पर राजनीतिक दावेदारी और संभावनाएं
एनडीए के कोटे से जनता दल यूनाइटेड (JDU) के दो सांसद हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। हरिवंश नारायण सिंह 2018 से राज्यसभा के उपसभापति के पद पर हैं, जबकि रामनाथ ठाकुर वर्तमान में नरेंद्र मोदी सरकार में कृषि राज्य मंत्री हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLP) के सांसद उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल भी इस बार खत्म हो रहा है। वहीं, महागठबंधन से आरजेडी के प्रेमचंद गुप्ता और अमृतधारी सिंह का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। इन सबके बीच, कुशवाहा की दोबारा राज्यसभा में वापसी की संभावना कम मानी जा रही है, जबकि पवन सिंह जैसे लोकप्रिय नेता को मौका मिल सकता है।
सामरिक समीकरण और संभावित उम्मीदवारों का मंथन
बिहार विधानसभा के वर्तमान राजनीतिक समीकरण ने इस बार राज्यसभा चुनाव को नई दिशा दी है। उपेंद्र कुशवाहा का दोबारा सांसद बनना लगभग असंभव माना जा रहा है, क्योंकि उनकी पार्टी के पास विधानसभा में केवल चार विधायक हैं, जिनमें से दो बागी हो चुके हैं। ऐसे में, उनके लिए अपने दम पर चुनाव जीतना मुश्किल है। यदि जदयू (JDU) या बीजेपी (BJP) उन्हें अपने कोटे से भेजने का फैसला करती है, तो ही उनकी वापसी संभव हो सकती है।
वहीं, आरजेडी के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है। पिछली बार के मुकाबले इस बार उनके पास पर्याप्त विधायक नहीं हैं, जिससे उन्हें अपनी दो सीटें गंवाने का खतरा है। विपक्षी दलों का समर्थन पाने के लिए उन्हें महागठबंधन और अन्य छोटे दलों का समर्थन जरूरी होगा, जो फिलहाल अनिश्चित है। इसलिए, माना जा रहा है कि आरजेडी इस बार अपनी दोनों सीटें खो सकती है।
एनडीए का पलड़ा इस बार मजबूत माना जा रहा है। वह अपने विधायकों के दम पर चार सीटें आसानी से जीत सकता है, और पांचवीं सीट के लिए भी अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है। भाजपा (BJP) इस बार जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और लोकप्रिय चेहरों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। चर्चा है कि भोजपुरी गायक और अभिनेता पवन सिंह को राज्यसभा भेजा जा सकता है, क्योंकि उनकी लोकप्रियता और जनाधार उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाते हैं।









