भारत में पेटेंट फाइलिंग में हो रही उल्लेखनीय वृद्धि
वर्ल्ड इंटेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन (WIPO) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत के आवेदनों की संख्या में 19.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह संकेत करता है कि देश में नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है। साथ ही, भारतीय पेटेंट कार्यालय (Indian Patent Office) में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। 2014 में जहां भारतीय आवेदनों का हिस्सा केवल 28.1 प्रतिशत था, वहीं 2024 तक यह आंकड़ा बढ़कर 60.1 प्रतिशत हो गया है। इसका अर्थ है कि अब अधिकतर इनोवेशन घरेलू स्तर पर ही विकसित हो रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर भारत का स्थान और पेटेंट ग्रोथ
पिछले पांच वर्षों में चीन, भारत और दक्षिण कोरिया पेटेंट फाइलिंग के क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। चीन ने लगभग 18.3 लाख आवेदन जमा किए हैं, जो दुनिया के आधे से अधिक पेटेंट आवेदन हैं। इसके अलावा, अमेरिका का हिस्सा 16.2 प्रतिशत, जापान का 8.2 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया का 6.6 प्रतिशत और यूरोपीय पेटेंट ऑफिस का 5.4 प्रतिशत है। भारत का हिस्सा अभी 2.8 प्रतिशत है, लेकिन इसकी रफ्तार तेज हो रही है।
पेटेंट मंजूरी और AI सेक्टर में भारत की प्रगति
पेटेंट फाइलिंग के साथ-साथ उसकी मंजूरी भी महत्वपूर्ण है। 2024 में ब्राजील और यूके जैसे देशों में आधे से कम आवेदनों को मंजूरी मिली, जबकि ऑस्ट्रेलिया में 99 प्रतिशत आवेदनों को स्वीकृति मिली। भारत ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है, जहां 78.6 प्रतिशत आवेदनों को मंजूरी मिली है। जापान में यह आंकड़ा 75.5 प्रतिशत रहा। साथ ही, सरकार भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत 1000 करोड़ रुपये का फंड प्रस्तावित किया है। इससे स्टार्टअप्स और बड़ी टेक कंपनियों में R&D पर खर्च बढ़ रहा है, जो देश की इनोवेशन क्षमता को मजबूत कर रहा है।









