हरियाणा के छांयसा गांव में रहस्यमय मौतों का सिलसिला जारी
हरियाणा के पलवल जिले के छांयसा गांव में लगातार हो रही मौतों ने पूरे क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल बना दिया है। जनवरी के अंतिम सप्ताह से लेकर फरवरी के दूसरे सप्ताह तक इस गांव में कई लोगों की आकस्मिक मृत्यु हुई है। इस संदर्भ में आजतक की टीम ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और इन घटनाओं के पीछे छिपे कारणों को समझने का प्रयास किया।
मौतों का सिलसिला और लक्षणों का समानता
टीम ने उन घरों का दौरा किया जहां मौतें हुईं और परिजनों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की कि इन मौतों से पहले मरीजों में कौन-कौन से लक्षण दिखाई दिए थे। परिजनों का कहना है कि अधिकतर मामलों में मरीजों को पेट दर्द, बुखार, उल्टी, कमजोरी और लीवर से जुड़ी समस्याएं देखी गईं। इन लक्षणों की समानता ने ग्रामीणों में भय और आशंका को जन्म दिया है।
मृतकों की पहचान और स्वास्थ्य संबंधी लक्षण
गांव में पहली मौत 14 वर्षीय सारिक की हुई, जो कक्षा 6 का छात्र था। उसके परिजनों ने बताया कि 26 जनवरी को उसे पेट दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन उसकी मौत हो गई। दूसरी मौत 9 वर्षीय हुफैज की हुई, जो चौथी कक्षा का छात्र था। उसके परिवार ने बताया कि रात को अचानक उसका बीपी बढ़ गया और उसे पलवल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे फरीदाबाद रेफर किया गया। 29 जनवरी को उसकी भी मौत हो गई।
तीसरी मौत 15 वर्षीय हुमा की हुई, जिसने 10वीं तक पढ़ाई की थी। 30 जनवरी को उसे पेट दर्द, बुखार और उल्टी की शिकायत हुई, जिसे लेकर वह मेवात के नल्लड़ मेडिकल कॉलेज गई। उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और 3 फरवरी को उसकी मौत हो गई। इसी तरह, 4 फरवरी को 65 वर्षीय जमीला और शमशुद्दीन की मौत भी हुई। इन सभी मामलों में लक्षण समान पाए गए, जिससे ग्रामीणों में भय और आशंका बढ़ गई है।
गांव में इन लगातार मौतों ने लोगों के मन में भय का माहौल बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मौतों के पीछे किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या या विषाक्तता का संकेत हो सकता है, जिसकी जांच अभी जारी है। इस तरह की घटनाएं न केवल स्वास्थ्य संबंधी चिंता को बढ़ाती हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती हैं।











