भारत में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों का विश्लेषण
देश में साइबर अपराधों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे आम जनता और वित्तीय संस्थान दोनों ही चिंतित हैं। गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में दी गई जानकारी में बताया कि 2021 से 2025 के बीच साइबर फ्रॉड के कारण लोगों के खातों से कुल ₹55,000 करोड़ से अधिक की राशि चोरी हो चुकी है। इस अवधि में साइबर ठगी के मामलों की संख्या भी लगातार बढ़ी है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।
पांच वर्षों में दर्ज शिकायतों और आर्थिक नुकसान का विस्तृत विश्लेषण
मंत्रालय के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में साइबर ठगी से जुड़ी कुल 6 करोड़ 58 लाख 9063 शिकायतें दर्ज की गई हैं। खास बात यह है कि 2025 में ही अकेले ₹22,495 करोड़ की ठगी हुई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस साल 24 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जो साइबर अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है। 2021 में 2,62,846 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो 2022 में बढ़कर 6,94,446 हो गईं। 2023 में यह संख्या 13,10,357 पहुंची, और 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 19,18,835 हो गया। 2025 में यह आंकड़ा 24,02,579 तक पहुंच गया।
साइबर ठगी से जुड़ी रिपोर्ट और सुरक्षा उपाय
रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में साइबर ठगी की रकम ₹551 करोड़ थी, जो 2022 में बढ़कर ₹2,290 करोड़ हो गई। 2023 में यह आंकड़ा ₹7,465 करोड़, 2024 में ₹22,848 करोड़ और 2025 में ₹22,495 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि, सरकार ने बताया कि I4C सिस्टम की मदद से 2025 में ₹8,189 करोड़ की रकम साइबर फ्रॉड से बचाई गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि साइबर अपराधों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, और सुरक्षा के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल जरूरी हो गया है।









