दिल्ली की सड़कों पर युवक की मौत: लापरवाही और प्रशासनिक खामियों का मामला
दिल्ली में एक युवक की सड़क दुर्घटना में मौत ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है। यह घटना केवल एक सामान्य हादसे से अधिक है, यह प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की उदासीनता का प्रतीक बन गई है। युवक का नाम कमल था, जो रोहिणी के एक बैंक कॉल सेंटर में काम करता था। उसकी अचानक गुमशुदगी ने परिवार और दोस्तों को रातभर परेशान कर दिया, लेकिन पुलिस की निष्क्रियता ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया।
परिवार की खोज और पुलिस की उदासीनता
कमल के परिजन और मित्र तुरंत ही घर से निकले और संभावित रास्तों, पार्कों, चौराहों और अंधे मोड़ों पर उसकी तलाश शुरू की। लेकिन रातभर की खोज के बावजूद कोई सुराग नहीं मिला। सबसे पहले उन्होंने जनकपुरी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। पुलिस ने न तो मोबाइल लोकेशन ट्रैक करने में मदद की और न ही सही दिशा में कोई कदम उठाया। आरोप है कि पुलिस ने मोबाइल लोकेशन का डेटा भी तुरंत डिलीट कर दिया, जिससे युवक का पता लगाना मुश्किल हो गया।
खुला गड्ढा और परिवार का संदेह
अंततः सुबह जब परिजन घर लौट रहे थे, तो उन्हें खबर मिली कि कमल का एक्सीडेंट हो गया है। वे तुरंत ही मौके पर पहुंचे और देखा कि युवक अपनी बाइक के साथ एक खुले, बिना बैरिकेडिंग वाले गड्ढे में पड़ा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गड्ढा काफी समय से खुला था, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी के कारण यह हादसा हो गया। परिवार का मानना है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हत्या का प्रयास भी हो सकता है, क्योंकि रास्ता बंद होने के बावजूद कमल खुद ही गड्ढे में गिर गया। उनका संदेह है कि कहीं उसकी हत्या कर शव को गड्ढे में फेंक दिया गया हो।









