इंदौर के मेडिकल कॉलेज में छात्र की संदिग्ध आत्महत्या का मामला
मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित सरकारी महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र अंतरिक्ष अग्रवाल ने अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। प्रारंभिक जांच में इसे पढ़ाई के दबाव का परिणाम माना गया था, लेकिन अब मृतक के परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की दिशा ही बदल दी है।
परिजनों का आरोप: रैगिंग और अत्याचार का खुलासा
अंतरिक्ष की चचेरी बहन श्रुति अग्रवाल ने उन भयावह परिस्थितियों का खुलासा किया है, जिनसे उनका भतीजा गुजर रहा था। उन्होंने बताया कि जूनियर छात्रों के लिए सीनियर्स ने अत्यंत कठोर और अपमानजनक नियम लागू कर रखे थे। श्रुति के अनुसार, जूनियर्स को रात में अपने कमरे का दरवाजा बंद करने की अनुमति नहीं थी ताकि सीनियर्स जब चाहें अंदर घुस सकें। इसके अलावा, कैंपस में जूनियर्स को सिर झुकाकर जूतों की तरफ देखते हुए चलना पड़ता था। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि मेस में सीनियर्स की मौजूदगी में जूनियर्स को खड़े होकर खाना खाने पर मजबूर किया जाता था।
पुलिस और परिवार की जांच: रैगिंग का संदेह
पुलिस का कहना है कि शुरुआती पूछताछ में साथी छात्रों ने पढ़ाई के दबाव का हवाला दिया है, लेकिन मृतक के पिता पंकज अग्रवाल ने इस थ्योरी को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा पढ़ाई में बहुत होनहार था और उसने नीट परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की थी, साथ ही स्टेट मेरिट में टॉप 50 में स्थान बनाया था। परिवार का मानना है कि रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न ने ही अंतरिक्ष को अंदर से तोड़ दिया।
अभी तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, और पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने कहा है कि परिवार अभी शोक में है, और अंतिम संस्कार के बाद उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। यदि रैगिंग की शिकायत साबित होती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच समिति का गठन किया है। वर्तमान में कॉलेज परिसर में तनाव का माहौल है और छात्र भय के साये में हैं।










