मध्य प्रदेश सरकार का सरदार सरोवर प्रभावित परिवारों के लिए ऐतिहासिक निर्णय
मध्य प्रदेश सरकार ने सरदार सरोवर परियोजना से विस्थापित परिवारों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब इन परिवारों को आवंटित रिहायशी प्लॉट की स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस सरकार स्वयं वहन करेगी। यह निर्णय प्रभावित परिवारों के आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकार ने यह फैसला मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया, जिसमें यह तय किया गया कि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण इन रजिस्ट्रेशन शुल्क और स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान करेगा। इस कदम से करीब 25,600 से अधिक परिवारों को लाभ मिलेगा, जो गुजरात में बने सरदार सरोवर बांध के कारण प्रभावित हुए हैं।
सरकार का यह कदम प्रभावित जिलों में जलभराव और वित्तीय बोझ को ध्यान में रखकर लिया गया है
यह निर्णय उन जिलों जैसे अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन और धार में रहने वाले परिवारों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जहां बांध के कारण जलस्तर बढ़ने से जमीन डूब गई है। इस फैसले से सरकार पर लगभग 600 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा, लेकिन यह प्रभावित परिवारों के पुनर्वास में मदद करेगा।
इसके साथ ही, सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में जीवनयापन को आसान बनाने के लिए नई सिंचाई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना है।
मैहर और कटनी जिलों के लिए दो नई सिंचाई परियोजनाओं की मंजूरी
कैबिनेट ने दो प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी है, जिनकी कुल लागत लगभग 620.65 करोड़ रुपये है। पहली परियोजना बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई योजना है, जिसकी लागत 566.92 करोड़ रुपये है। इससे बरही और विजयराघवगढ़ तहसील के 27 गांवों की 20 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
दूसरी योजना धनवाही सूक्ष्म दबाव सिंचाई परियोजना (मैहर-कटनी) है, जिसकी लागत 53.73 करोड़ रुपये है। इस योजना से नौ गांवों के लगभग 2,810 किसान लाभान्वित होंगे और 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना है।









