मध्य प्रदेश में बाघों की मौत का सिलसिला जारी
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में करंट लगने से एक बाघ और एक बाघिन की दुखद मौत हो गई है, जिससे वन्यजीव प्रेमियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस वर्ष अब तक राज्य में कुल नौ बाघों की जान जा चुकी है, जो चिंता का विषय बन गया है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ शावक की मृत्यु
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक बाघ के शावक की मौत की खबर भी सामने आई है। एक अधिकारी ने बताया कि किसान अपने फसलों को सुरक्षित रखने के लिए बिजली के जाल लगाते हैं, लेकिन इन जालों में अक्सर बाघ फंसकर मर जाते हैं। यह घटना तब हुई जब हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे की याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।
याचिका में बाघों की मौत का कारण और सरकार पर आरोप
अजय दुबे ने अपनी याचिका में दावा किया कि 2025 में राज्य में 54 बाघों की मौत हुई, जो प्रोजेक्ट टाइगर शुरू होने के बाद से सबसे अधिक वार्षिक मृत्यु दर है। इनमें से आधे से ज्यादा मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुई हैं। उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट इस मामले की फिर से 11 फरवरी को सुनवाई करेगा। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शहडोल घटना में प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है। दुबे ने वन्यजीव संरक्षण में सुधार की मांग की है और वरिष्ठ वन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही है।
मध्य प्रदेश को देश का ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है क्योंकि यहाँ सबसे अधिक बाघ पाए जाते हैं। हालांकि, इस साल जनवरी के पहले 26 दिनों में ही देशभर में 19 बाघों की मौत हो चुकी है। NTCA की वेबसाइट के अनुसार, 26 जनवरी को अंतिम मामला मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन में दर्ज किया गया था।











