UGC नियमों का समाज पर प्रभाव और सरकार का दृष्टिकोण
यूजीसी (University Grants Commission) के नए नियमों का समाज पर दोहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। कुछ के लिए यह विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा, तो वहीं दूसरी ओर यह समाज में विभाजन और विनाश का कारण भी बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बिल बिना विचार-विमर्श के पारित हो गया, तो यह समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अभी यह बिल संसद में लंबित है और सरकार इस पर पुनः विचार कर रही है।
महामंडलेश्वर अन्नपूर्णागिरी का सुझाव और सामाजिक समरसता का संदेश
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में भाग लेने आई महामंडलेश्वर अन्नपूर्णागिरी ने कहा कि सरकार को इस बिल पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे समाज में सामाजिक समरसता के पक्षधर हैं, क्योंकि वे भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के अनुयायी हैं। उनका कहना है कि राम ने हमें सिखाया है कि सच्चा मिलन राम मंदिर या शबरी के बेरों में ही नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू में है।
संतों का सम्मान और धार्मिक परंपराओं का संरक्षण जरूरी
अन्नपूर्णागिरी ने माघ मेले प्रयागराज में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वह एक गलतफहमी थी। उन्होंने शंकराचार्य जी को भगवान मानते हुए उनके साथ हुई बदसलूकी का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पुलिस का अनुशासन अच्छा है, लेकिन बटुकों और ब्राह्मणों के साथ जो व्यवहार हुआ, वह अनुचित था। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में संतों का सम्मान सर्वोपरि है और इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। साथ ही, उन्होंने योगी आदित्यनाथ जैसे संतों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने धर्म और राष्ट्र दोनों के लिए काम किया है।









