भोपाल में गौमांस बरामदगी और राजनीतिक विवाद
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 26 टन गौमांस मिलने का मामला प्रकाश में आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। इस घटना के बाद हिंदूवादी संगठनों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है, और वे सरकार व प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मामले की जांच के लिए SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन किया गया है, लेकिन संगठन महापौर मालती राय के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं।
हिंदू संगठनों का विरोध और महापौर के खिलाफ प्रदर्शन
बुधवार को भोपाल में महापौर के सरकारी आवास पर बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुंच गए। उन्होंने महापौर के निवास के बाहर लगे पोस्टर फाड़ दिए और उनके नाम की प्लेट पर कालिख पोत दी। कार्यकर्ताओं ने महापौर को ‘मुल्ला महापौर’ कहकर संबोधित किया और उनके इस्तीफे की नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नगर निगम के स्लॉटर हाउस और अवैध मांस कारोबार में महापौर की भूमिका संदिग्ध है।
संबंधित आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
बजरंग दल के विभाग संयोजक अभिजीत सिंह राजपूत ने सवाल उठाया कि असलम चमड़ा और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई? उन्होंने पूछा कि असलम चमड़ा को जमानत किस आधार पर मिली और मामले में कौन-कौन सी धाराएँ लगी हैं। वहीं, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि नगर निगम द्वारा स्लॉटर हाउस टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितताएँ पाई गई हैं। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।









