हरियाणा के जींद जिले में खुशियों का नया अध्याय
हरियाणा के जींद जिले के उचाना कलां गांव में इन दिनों एक घर की कहानी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। इस घर में 24 वर्षों के बाद एक नई खुशखबरी आई है। सुरेंद्र के घर आखिरकार बेटे की किलकारी गूंजी है। इससे पहले इस परिवार में लगातार नौ बार बेटियों का जन्म हुआ था, लेकिन इस बार भाग्य ने ऐसा मोड़ लिया कि न केवल एक पिता को बेटा मिला, बल्कि उसकी 12 बहनों का एक साझा भाई भी मिल गया। सुरेंद्र के भाई की भी तीन बेटियां हैं।
प्रसव के दौरान मिली खुशखबरी और परिवार की उमंग
शाम के करीब चार बजे सुरेंद्र की पत्नी रीतू को प्रसव पीड़ा के कारण उचाना के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की देखरेख में सामान्य प्रसव हुआ, और बेटे का जन्म हुआ। जैसे ही यह खबर घर और रिश्तेदारों तक पहुंची, पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। रीतू और सुरेंद्र की शादी को लगभग 23-24 साल हो चुके हैं। इन वर्षों में रीतू ने नौ बेटियों को जन्म दिया। सुरेंद्र बताते हैं कि जब भी किसी बेटी का जन्म होता, लोग यही कहते थे कि भगवान बेटा भी दे। इस बार भी जब रीतू गर्भवती थीं, तो पूरा परिवार ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहा था कि इस बार बेटा हो, ताकि बेटियों को एक भाई मिल सके। साथ ही, सुरेंद्र के दूसरे भाई की भी तीन बेटियां हैं, जिनके पास भी कोई बेटा नहीं है। इस तरह यह बेटा पूरे परिवार के लिए सिर्फ एक संतान नहीं, बल्कि 12 बहनों का साझा भाई बन गया।
बेटे का नाम और परिवार में खुशियों का माहौल
बच्चे के जन्म के बाद परिवार ने उसका नाम ‘दिलखुश’ रखा है। इस नाम के पीछे भी एक खास भावना जुड़ी है। बुआ वीना कहती हैं, “आज हमें सारी खुशियां मिल गई हैं। नौ सगी बहनों और तीन ताऊ की बेटियों को भाई मिल गया है। भगवान राम ने हमारा दिल खुश कर दिया, इसलिए बच्चे का नाम दिलखुश रखा गया है। घर के आंगन में मिठाइयां बांटी जा रही हैं, रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ है, और हर कोई नवजात बच्चे को देखने और मां को बधाई देने पहुंच रहा है।”
पिता सुरेंद्र अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ हैं, लेकिन उन्होंने कहा, “भगवान की कृपा से नौ बेटियों के बाद आखिरकार बेटा हुआ है। जब भी बेटियों का जन्म होता था, लोग कहते थे कि भगवान बेटा दे। अब भगवान ने हमारी सुन ली है। सबसे बड़ी खुशी यह है कि मेरी बेटियों को भाई मिल गया है।” उनकी सबसे बड़ी बेटी की उम्र 21 साल है, और सबसे छोटी अभी तीन साल की है। पिछले साल नवंबर में उनकी दो बेटियों की शादी भी हुई थी। सुरेंद्र बताते हैं कि घर में सभी बेटियों के नाम कल्पना, आरती, भारती, खुशी, मानसू, रजनी, रजीव, काफी और माफी हैं। इन सबकी दुआओं से ही आज यह खुशी मिली है।
मां रीतू ने कहा, “भगवान ने नौ बेटियों के बाद बेटा दिया है। शादी को 23 साल हो चुके हैं। मैं भगवान का धन्यवाद करती हूं कि उन्होंने हमें यह खुशी दी।” रीतू की उम्र 38 साल है और इससे पहले उनकी नौ डिलीवरी हो चुकी थीं, इसलिए यह प्रसव चिकित्सकीय दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। परिवार की बड़ी बेटी कल्पना ने कहा, “घर में खुशी का माहौल है। 22 साल बाद हमारे घर में छोटा बाबू आया है। इतनी खुशी है कि शब्दों में बयां नहीं कर सकते। यह सिर्फ मेरे चाचा का बेटा नहीं, बल्कि हम सभी का भाई है।” बहनों का कहना है कि उन्होंने हमेशा एक-दूसरे का सहारा बनने की सीख ली है, लेकिन अब घर में एक भाई का होना उनके लिए नई खुशी और जिम्मेदारी दोनों लेकर आया है।
डॉ. योगेश शर्मा ने बताया कि रीतू को शाम करीब चार बजे अस्पताल लाया गया था। उनकी पहले नौ डिलीवरी हो चुकी थीं और उम्र भी 38 साल थी, इसलिए विशेष निगरानी जरूरी थी। लेकिन डिलीवरी सामान्य रही, और मां और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉ. शर्मा ने कहा कि रीतू सुबह भी अस्पताल आई थीं, लेकिन शाम को फिर भर्ती कराया गया। बीपी एक बार थोड़ा बढ़ा था, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो गई।
परिवार और रिश्तेदारों में जश्न का माहौल
मौसी वीना ने कहा, “बेटे के जन्म से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। मामा, मौसी, बुआ सब खुश हैं। इतनी खुशी है कि शब्द कम पड़ रहे हैं।” परिवार के सदस्य प्रवीण ने बताया, “जब बेटे के जन्म की खबर मिली, तो हम खुशी के मारे खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। डिलीवरी बिल्कुल सही हुई है। सरकारी अस्पताल में इतनी अच्छी सुविधा मिलने के लिए हम डॉक्टरों का धन्यवाद करते हैं।”











