हरदा के एकलव्य विद्यालय में छात्रों का प्रदर्शन और शिकायतें
मध्य प्रदेश के हरदा जिले में स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय के सैकड़ों छात्र अपने स्कूल प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। इन छात्रों ने खराब भोजन, गंदगी और प्रिंसिपल के कथित मानसिक उत्पीड़न के कारण यह कदम उठाया। छात्र अपनी शिकायतें लेकर जिला कलेक्टर से मिलने के लिए पैदल ही निकले, जिससे स्कूल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
छात्रों का कड़ा विरोध और प्रशासनिक कार्रवाई का आश्वासन
राहतगांव के इस एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल के लगभग 400 छात्र कड़ाके की ठंड में करीब 40 किलोमीटर का सफर तय कर कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे। जब वे लगभग 9 किलोमीटर चल चुके थे, तभी कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने उन्हें सोडलपुर में नेशनल हाईवे पर मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं। कलेक्टर ने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी शिकायतों का समाधान किया जाएगा और उन्हें बसों के माध्यम से स्कूल वापस भेज दिया गया।
शिक्षण व्यवस्था और शिकायतों का समाधान
छात्रों ने आरोप लगाया कि स्कूल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, भोजन की गुणवत्ता खराब है और साफ-सफाई की स्थिति भी ठीक नहीं है। इन छात्रों का यह भी दावा है कि शिकायत करने के बाद प्रिंसिपल ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया। एक छात्र ने बताया कि शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
कलेक्टर जैन ने छात्रों से बातचीत के दौरान प्रिंसिपल को हटाने की मांग भी सुनी। उन्होंने कहा कि भोजन की गुणवत्ता की जांच के लिए एक पेरेंट्स कमेटी बनाई जाएगी और शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए एक संपर्क समिति भी गठित की जाएगी, जिससे छात्र सीधे कलेक्टर या संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकेंगे।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि प्रिंसिपल के खिलाफ शिकायतें मिली हैं और मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, स्थानीय कांग्रेस विधायक ने हॉस्टल का निरीक्षण किया और मीडिया को बताया कि किचन में रखे खाने के सामान में कई कमियां पाई गई हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पीने के पानी की टंकी में पेड़ की जड़ें मिली हैं, जिसे लेकर उन्होंने घटना की जांच की मांग की।
मध्य प्रदेश के आदिवासी मामलों के विभाग के अंतर्गत, राज्य में 63 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल संचालित हैं, जो अनुसूचित जनजाति के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संपूर्ण विकास का अवसर प्रदान करते हैं। ये स्कूल भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार छात्रों को सुविधाएं और सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।









