उन्नाव केस में कुलदीप सिंह सेंगर को फिर मिली निराशा
उन्नाव रेप मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से एक बार फिर झटका लगा है। हाईकोर्ट की एकल पीठ, जस्टिस रविन्द्र डूडेजा ने सेंगर की सजा निलंबित करने और जमानत की याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में दी गई दस साल की सजा से संबंधित थी।
सजा और अपील में हुई देरी का कोर्ट का निर्णय
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सेंगर ने अब तक लगभग 7.5 साल की सजा पूरी कर ली है, लेकिन उनकी अपील की सुनवाई में हुई देरी का कुछ हद तक कारण स्वयं सेंगर द्वारा बार-बार नई याचिकाएं दाखिल करना भी रहा है। कोर्ट ने माना कि सजा निलंबित करने के लिए कोई नई या सुधारात्मक परिस्थिति मौजूद नहीं है।
सजा निलंबन पर कोर्ट का निर्णय और आगे की प्रक्रिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सेंगर के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें इस मामले में जमानत नहीं दी जा सकती। यदि दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील पर शीघ्र फैसला होता है, तो यह उनके हित में होगा। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि सेंगर की कुल सजा दस साल की है, जिसमें से वह लगभग साढ़े सात साल जेल में बित चुके हैं। बावजूद इसके, सजा निलंबित करने का कोई आधार नहीं बनता। अंत में, कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता, सेंगर के पिछले रिकॉर्ड और नई परिस्थितियों के अभाव में सजा को निलंबित नहीं किया जा सकता, और जमानत की याचिका खारिज कर दी गई।










