मकर संक्रांति 2026 का सही तिथि निर्धारण और महत्व
मकर संक्रांति का त्योहार वर्ष 2026 में 14 जनवरी को मनाया जाएगा, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन का शुभारंभ माघ कृष्ण एकादशी तिथि के साथ होगा, जो 13 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर 14 जनवरी को शाम 05 बजकर 52 मिनट तक चलेगी। वहीं, 14 जनवरी को पूरे दिन मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है, जो नए साल की शुरुआत का प्रतीक है।
मकर संक्रांति और एकादशी व्रत में भ्रम और सही तिथि का महत्व
हालांकि, सोशल मीडिया पर मकर संक्रांति और एकादशी व्रत को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ ज्योतिषाचार्य 14 जनवरी को ही इस पर्व को मनाने की सलाह दे रहे हैं, जबकि अन्य पंडित 15 जनवरी को इसे मनाने का सुझाव दे रहे हैं। इस असमंजस के बीच श्रद्धालु सही तिथि का निर्धारण करने में उलझ गए हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत और मकर संक्रांति का पर्व अलग-अलग तिथियों पर मनाए जाते हैं। एकादशी व्रत के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है, जबकि मकर संक्रांति पर खिचड़ी और तिल-गुड़ का दान शुभ माना जाता है। इसलिए, सही तिथि का ज्ञान और परंपराओं का पालन आवश्यक है।
मकर संक्रांति पर शुभ कार्य और दान की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के अवसर पर खिचड़ी बनाना और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन चावल का सेवन वर्जित है, जबकि तिल और गुड़ का दान विशेष रूप से किया जाता है। ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु के अनुसार, 14 जनवरी को तिल, गुड़, फल, दूध, घी, वस्त्र, और गर्म कपड़ों का दान करना चाहिए। इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। रात में खिचड़ी बनाकर खाने का परंपरागत रिवाज है, और तिल-गुड़ का सेवन दिनभर किया जा सकता है। तिल का दान पितृ दोष और ग्रह दोष को शांत करता है, साथ ही शरीर को ऊर्जा और सौभाग्य प्रदान करता है।











