अमेरिका से भारत लौटे बुजुर्ग डॉक्टर दंपति को साइबर ठगों ने किया शिकार
48 वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र (UN) में सेवा करने के बाद भारत लौटे एक वरिष्ठ डॉक्टर दंपति को साइबर अपराधियों ने जाल में फंसाया। इन ठगों ने उन्हें करीब 15 दिनों तक डिजिटल गिरफ्त में रखा और वीडियो कॉल के माध्यम से फर्जी पुलिस, जज और राष्ट्रीय सुरक्षा का भय दिखाकर आठ अलग-अलग ट्रांजैक्शन में लगभग 14 करोड़ 85 लाख रुपये हड़प लिए।
डिजिटल अरेस्ट और फर्जी धमकियों का खेल
ठगों ने दावा किया कि मुंबई के कैनरा बैंक में तनेजा कपल के नाम पर एक खाता खुला है, जिससे बड़ा धोखाधड़ी का मामला जुड़ा है। इंदिरा तनेजा ने स्पष्ट किया कि वह कभी मुंबई नहीं गईं और बिना अपने पति के कभी भी बैंक खाता नहीं खुलवाया। इसके बावजूद, ठगों ने डर का माहौल बनाना शुरू कर दिया।
उन्होंने बातचीत के दौरान अचानक नेशनल सिक्योरिटी और बड़े आर्थिक अपराध का जिक्र किया। पीMLए (PMLA), मनी लॉन्ड्रिंग कानून, सुप्रीम कोर्ट और गिरफ्तारी वारंट का हवाला देते हुए कहा गया कि यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है। यदि जानकारी लीक हुई तो उनके और उनके पति के जीवन को खतरा हो सकता है। इसी डर के कारण, डॉक्टर दंपति को डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया।
15 दिनों की डिजिटल कैद और निगरानी का जाल
24 दिसंबर से 9-10 जनवरी तक, डॉक्टर दंपति को लगातार वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा गया। जब भी उन्हें बाहर जाना होता या किसी से बात करनी होती, ठग उनके पति के फोन पर वीडियो कॉल कर सब कुछ सुनते और देखते थे।
उनसे कहा गया कि बाहर किसी से बात करने की मनाही है और सोशल मीडिया, व्हाट्सएप से दूरी बनानी है। हर बार यह डराते हुए कहा गया कि जान को खतरा है। इंदिरा तनेजा ने बताया कि उन्हें कहा गया था कि वे सर्विलांस पर हैं और बाहर नहीं निकल सकतीं। किसी से बात करने पर अरेस्ट का खतरा था।
ठगों ने खुद को पुलिस, ड्यूटी ऑफिसर और सुप्रीम कोर्ट के अधिकारी बताकर फर्जी लेटर भी लिखवाए। वीडियो कॉल के जरिए नकली जज बनाकर उन्हें कई दस्तावेज़ भी बनवाए गए। भरोसा दिलाया गया कि यदि पैसे जांच के लिए ट्रांसफर कर दिए गए, तो वे रिफंड हो जाएंगे और क्लीन चिट भी मिल जाएगी।
बैंक में जाकर पैसे निकालने के दौरान भी ठगों ने झूठी कहानी रटाई। कहा गया कि यदि बैंक मैनेजर पूछे तो पति निवेश कर रहे हैं या फंड किसी पर्यावरण या स्वास्थ्य परियोजना के लिए है। इस तरह, आठ ट्रांजैक्शन में धीरे-धीरे करीब 14.85 करोड़ रुपये निकाल लिए गए।
जब 10 जनवरी को डॉक्टर दंपति थाने पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि उनके साथ 14 करोड़ 85 लाख रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है। इस खुलासे के बाद, दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच स्पेशल सेल की साइबर यूनिट IFSO को सौंप दी है। अब पुलिस फर्जी दस्तावेज, वीडियो कॉल सर्विलांस और मनी ट्रेल की जांच कर रही है।
पीड़ित दंपति ने ट्रांजैक्शन के स्क्रीनशॉट भी साझा किए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह धोखाधड़ी कई दिनों तक चलने वाली सुनियोजित डिजिटल कैद का परिणाम थी। बैंक स्टेटमेंट में 30 दिसंबर 2025 की एंट्री है, जिसमें RTGS के जरिए 2 करोड़ रुपये एक खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। साथ ही, मोबाइल पर प्राप्त एसएमएस अलर्ट भी इस ट्रांजैक्शन की पुष्टि करते हैं।
वॉट्सऐप चैट और कॉल लॉग से पता चलता है कि ठग लगातार निगरानी कर रहे थे। स्क्रीन शेयरिंग और लाइव स्क्रीन देखने जैसी गतिविधियों से साफ है कि पीड़ित का फोन पूरी तरह से ट्रैक किया जा रहा था। इस तरह, साइबर ठगी का यह जाल कई दिनों तक चलता रहा और पूरी योजना के तहत रकम हड़पी गई।









