बिहार में अनोखी कोर्ट मैरिज का मामला सामने आया
बिहार के वैशाली जिले में एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है जिसने रिश्तों की परंपराओं को नई दिशा दी है। तीन बच्चों की मां रानी कुमारी ने अपने फुफेरे भाई गोबिंद कुमार से प्रेम कर शादी कर ली है, और इस दौरान उनके पति कुंदन कुमार ने खुद ही गवाह बनकर इस विवाह का समर्थन किया। इस घटना ने सभी को चौंका दिया है, क्योंकि अब बच्चे अपने पिता के साथ रहेंगे।
रिश्तों में आई खटास और पति का अनूठा निर्णय
रानी का व्यवहार अचानक बदलने लगा और वह कई बार अपने पति और बच्चों को छोड़कर गोबिंद के पास चली जाती थी। कुछ साल पहले वह घर से अचानक गायब हो गई थी, जिसे काफी प्रयासों के बाद वापस लाया गया। उस समय कुंदन जम्मू (Jammu) में काम कर रहे थे, लेकिन रानी वहां भी नहीं टिक सकीं। डेढ़ महीने पहले फिर से वही कहानी दोहराई गई। कुंदन ने अपने परिवार की दुहाई दी और रानी को वापस लाने का प्रयास किया, लेकिन रानी का मन कहीं और ही था।
कुंदन का साहसिक फैसला और कोर्ट मैरिज का समर्थन
बार-बार पत्नी का घर छोड़ना, बच्चों की चिंता और समाज की बातें कुंदन को अंदर से तोड़ रही थीं। अंततः उन्होंने समझदारी दिखाते हुए फैसला किया कि यदि रानी को खुशी गोबिंद के साथ ही है, तो वह उन्हें रोकेंगे नहीं। उन्होंने न तो कानूनी लड़ाई चुनी और न ही हंगामा किया। बल्कि, रानी और गोबिंद की कोर्ट मैरिज कराना अपने हाथों में ले लिया। जब वैशाली कोर्ट में रानी और गोबिंद ने शादी के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, तो वहां मौजूद लोगों के लिए सबसे बड़ा आश्चर्य था कि कुंदन खुद ही गवाह बनकर खड़े थे।
कुंदन ने कहा कि वह अब थक चुके हैं और अपने बच्चों के हित में रानी को आजाद कर दिया है। उन्होंने अपने इस फैसले को साहसिक और प्रेरणादायक बताया।
नई शुरुआत और भरोसे के साथ जीवन का नया अध्याय
शादी के बाद गोबिंद कुमार ने भरोसा जताया कि रानी अब उनके साथ ही रहेंगी और कभी वापस नहीं जाएंगी। उन्होंने बताया कि दोनों के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही थी और हाल ही में हुई फोन कॉल के बाद उन्होंने इस नए जीवन का फैसला किया। गोबिंद का मानना है कि अब सब कुछ स्पष्ट है, कोई अधूरा रिश्ता नहीं है और यह उनके जीवन की नई शुरुआत है।
वहीं, रानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वह पहले पति के साथ खुश नहीं थीं और कुंदन के साथ रहना उनके लिए मानसिक रूप से कठिन था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके तीनों बच्चे कुंदन के साथ ही रहेंगे और वह इस निर्णय से संतुष्ट हैं। रानी का कहना है कि गोबिंद के साथ उन्हें समझ और अपनापन मिला, जो उन्हें अपने वैवाहिक जीवन में नहीं मिल पाया था।











