मुंगेर के अस्पताल में घोर लापरवाही का मामला सामने आया
बिहार के मुंगेर जिले में एक निजी अस्पताल की करतूत ने स्वास्थ्य सेवा की विश्वसनीयता को हिला कर रख दिया है। कोतवाली थाना क्षेत्र के तोपखाना बाजार में स्थित मुंगेर नेशनल हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप लगे हैं कि यहां एक सड़क दुर्घटना में घायल युवक का दाहिना पैर बिना परिजनों की जानकारी के काट दिया गया। साथ ही, इलाज के नाम पर लाखों रुपये की वसूली भी की गई। अस्पताल प्रबंधन ने पैसे न देने पर पीड़ित परिवार को करीब 13 दिनों तक बंधक बनाकर रखा।
घटना का संक्षिप्त विवरण और पीड़ित का संघर्ष
यह मामला लखीसराय जिले के मेदनी चौकी निवासी महेश साहू के 35 वर्षीय पुत्र टिंकू साव से जुड़ा है। 24 नवंबर 2025 को टिंकू अपने रोजमर्रा के काम के तहत साइकिल पर बर्तन बेचने निकला था। तभी हेमजापुर थाना क्षेत्र के शिवकुंड के पास एक वाहन ने उसे टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने उसे तुरंत ही मुंगेर के सदर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका प्राथमिक उपचार शुरू हुआ।
अस्पताल में हुई हैरान कर देने वाली घटना और परिवार का आरोप
परिजनों का आरोप है कि घटना के दौरान डॉक्टरों ने बिना किसी सूचना के ही टिंकू का दाहिना पैर काट दिया। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान उसे इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया गया था। जब वह होश में आया, तो उसे पता चला कि उसका पैर काट दिया गया है। टिंकू का कहना है कि यदि उसे पटना ले जाया जाता, तो उसके पैर में स्टील लग सकता था और उसकी आवश्यकता नहीं पड़ती। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने सिर्फ बिल बनाने के लिए ही यह कदम उठाया और उसे दिव्यांग बना दिया।
पीड़ित परिवार ने बताया कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर करीब चार लाख रुपये वसूले। इसमें बेड चार्ज, डॉक्टर फीस, दवाइयों और सुई के नाम पर लाखों रुपये शामिल हैं। इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने दो लाख 90 हजार रुपये की और मांग की। पैसे न देने पर परिजनों को धमकी दी गई कि उनके सदस्य अस्पताल में बंधक रहेंगे। परिवार ने कर्ज और चंदा जुटाकर इस रकम का भुगतान किया। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए।










