सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़ी सुनवाई का अहम घटनाक्रम
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने आवारा कुत्तों से संबंधित मामलों पर सभी पक्षों की दलीलें सुनीं। इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मजाकिया लहजे में टिप्पणी की कि कुत्ते और बिल्लियां आमतौर पर दुश्मन होते हैं, इसलिए क्या ज्यादा बिल्लियों और कम कुत्तों को बढ़ावा देना ही समाधान हो सकता है।
पक्षकारों की राय और कोर्ट की टिप्पणी
एनिमल राइट एक्टिविस्ट, कुत्ता काटने के शिकार और एनजीओ के वकीलों ने सुरक्षा, बजट और एबीसी (ABC) नियमों के पालन पर अपने विचार व्यक्त किए। वकीलों ने शेल्टर होम के लिए 26,800 करोड़ रुपये की आवश्यकता और इंसानों के घरों के लिए बजट की तुलना जैसे गंभीर तर्क प्रस्तुत किए। कोर्ट ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि आवारा या पालतू कुत्ता इंसान के डर को सूंघकर ही उस पर हमला करता है।
आवारा कुत्तों और उनके नियंत्रण से जुड़ी चर्चाएं
एनजीओ के वकील सीयू सिंह ने तर्क दिया कि यदि कुत्तों को अचानक हटाया गया, तो चूहों की आबादी तेजी से बढ़ जाएगी। उन्होंने 20-30 साल पहले सूरत में हुई घटना का उदाहरण देते हुए संतुलन बनाए रखने की बात कही। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि इंस्टीट्यूशनल इलाकों में बंदरों की समस्या भी गंभीर है। कोर्ट ने पूछा कि क्या सूरत की घटना का कुत्तों को हटाने से कोई सीधा संबंध था।
एक अन्य वकील ने आर्थिक दृष्टिकोण से कहा कि यदि आवारा कुत्तों के लिए 91,800 नए शेल्टर बनाने के लिए 26,800 करोड़ रुपये चाहिए, तो क्या यह पैसा इंसानों के घर बनाने में नहीं खर्च किया जाना चाहिए? ध्रुव मेहता ने यह भी कहा कि जब तक कुत्तों के रहने की जगह तय नहीं होती, उन्हें पकड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने डेटा मिलने तक आदेश को स्थगित करने की मांग की, क्योंकि नगर पालिकाओं के पास इसके लिए अलग बजट नहीं है।
आवारा कुत्तों के मुद्दे पर 4 जनवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी हुआ था। इस मामले में चर्चा जारी रहेगी।











