दिल्ली के तुर्कमान गेट में अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई का विवाद
दिल्ली के तुर्कमान गेट क्षेत्र में मस्जिद के पास अवैध निर्माण को हटाने के दौरान पुलिस ने बुलडोजर का इस्तेमाल किया, जिससे भारी तनाव और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस हुई, वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी भी मौके पर पहुंचे और पुलिस से उनकी नोकझोंक हुई।
सांसद का आरोप और कार्रवाई की नैतिकता पर सवाल
मोहिबुल्लाह नदवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह कार्रवाई रात के समय की गई, जबकि सर्दियों में लोग रैन बसेरे की तलाश में होते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह की कार्रवाई को टाला नहीं जा सकता था, खासकर जब एमसीडी के पास अभी भी समय था। सांसद ने यह भी कहा कि वह मौके पर इसलिए पहुंचे ताकि स्थिति उग्र न हो और लोगों का भरोसा बना रहे। उन्होंने यह भी बताया कि तीन महीने से मामला कोर्ट में लंबित था और इस कार्रवाई को 12 फरवरी तक टाला जा सकता था। यदि सही तरीके से कदम उठाए जाते, तो कोई समस्या नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मस्जिद होती, तो प्रशासन को रात में भी कार्रवाई करनी पड़ती, लेकिन यह मामला धार्मिक स्थल से जुड़ा नहीं है।
मेयर का बयान और अवैध निर्माण का स्पष्ट विवरण
दिल्ली नगर निगम के मेयर राजा इकबाल ने कहा कि निगम ने केवल अवैध निर्माण को ही हटाया है। उन्होंने बताया कि 1940 में एलएनडीओ (L&DO) ने कब्रिस्तान को लगभग 900 वर्ग मीटर जमीन दी थी, जहां बाद में मस्जिद बनी। विवाद का मुख्य कारण मस्जिद के बगल में रामलीला ग्राउंड के अंदर किए गए बड़े अवैध निर्माण थे, जिसमें बैंक्वेट हॉल और अन्य सुविधाएं चल रही थीं। मेयर ने यह भी स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार ही अवैध निर्माण को हटाया गया है और किसी भी धार्मिक स्थल को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि रात के समय की गई कार्रवाई का मकसद केवल अवैध निर्माण को हटाना था, और इसमें समय का कोई महत्व नहीं है।










