इंदौर में दूषित पानी और स्वास्थ्य संकट का गहरा प्रभाव
मध्य प्रदेश के प्रमुख शहर इंदौर की पहचान पहले स्वच्छता के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब यहां पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हाल के दिनों में, दूषित पेयजल के कारण फैले डायरिया संक्रमण ने शहर में स्वास्थ्य संकट को जन्म दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस बीमारी से अब तक लगभग 398 लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 256 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि अभी भी 142 मरीज अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इनमें से 11 मरीज आईसीयू में हैं।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और जांच अभियान जारी
रविवार को स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन सतर्कता बरती जा रही है। शहर के सबसे साफ-सुथरे इलाकों में भी गंदे पानी की आपूर्ति और इसके कारण होने वाली मौतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। इस संकट के बीच 9000 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है, और 20 नए डायरिया के मामले सामने आए हैं। साथ ही, पुराने मरीजों का फॉलोअप भी किया जा रहा है।
विशेष टीम की जांच और राहत कार्य
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि कोलकाता स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इंफेक्शंस (NIRBI) की एक विशेषज्ञ टीम इंदौर पहुंच चुकी है। यह टीम संक्रमण के कारणों की गहराई से जांच कर रही है और संक्रमण को रोकने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। इसके साथ ही, इलाके में प्रत्येक घर में ओआरएस के 10 पैकेट, जिंक गोलियां और पानी को शुद्ध करने के लिए क्लीन वेट की बोतलें वितरित की जा रही हैं। 17 टीमें और 5 एंबुलेंस भी तैनात की गई हैं, और 24 घंटे डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है।









