दिल्ली दंगों से जुड़ी बड़ी साजिश का सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा
दिल्ली में हुई दंगों की कथित बड़ी साजिश से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट आगामी 5 जनवरी को अपना फैसला सुनाने वाला है। इस सुनवाई के दौरान आरोपियों और दिल्ली पुलिस दोनों ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए। आरोपियों ने जांच और ट्रायल की प्रक्रिया में हुई देरी पर सवाल उठाए, जबकि पुलिस ने इसे देश की स्थिरता को बिगाड़ने की साजिश बताया।
आरोपियों और पुलिस की दलीलें
आरोपियों के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि इस मामले की जांच में अनावश्यक और असामान्य देरी हुई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद भी ट्रायल में कई वर्षों का विलंब हुआ, जबकि आरोपी पहले से ही जेल में हैं। उनका आरोप है कि पुलिस बार-बार सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करती रही, जिससे केस लंबा खिंचता रहा और मामला अनिश्चितकाल तक टलता रहा।
पुलिस का तर्क और मामले की जटिलता
दिल्ली पुलिस ने अपने तर्क में कहा कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि यह एक पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी। पुलिस का दावा है कि यह ‘रेजीम चेंज ऑपरेशन’ का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य भारत को अस्थिर करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाना था। पुलिस ने यह भी कहा कि यह हिंसा उस समय कराई गई जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर थे, ताकि विश्व का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा सके।
इसके अलावा, पुलिस ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को भड़काऊ मुद्दा बनाकर विरोध को हिंसक रूप देने की कोशिश की गई। गवाहों के बयान, दस्तावेज और तकनीकी सबूत आरोपियों को इस कथित साजिश से जोड़ते हैं। ट्रायल में हुई देरी के लिए भी पुलिस ने आरोपियों को जिम्मेदार ठहराया है। अब सुप्रीम कोर्ट इन सभी दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर अपना निर्णय सुनाएगा।











