इंदौर में दूषित पानी से मौतों का मामला: हाई कोर्ट का सख्त रुख
मध्य प्रदेश की इंदौर बेंच ने हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने और प्रभावित परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई का आदेश
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चाहे कलेक्टर हो या एसडीएम, किसी को भी बुलाना पड़े, तुरंत बुलाया जाए। साथ ही, अदालत ने कहा कि पानी के टैंकर हर हाल में प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने चाहिए। इंदौर नगर निगम ने अदालत को सूचित किया कि अब तक 30 पानी के टैंकर भेजे जा चुके हैं और चार और टैंकर तुरंत भेजे जाएंगे। इसके साथ ही, नगर निगम ने अदालत में अपनी स्थिति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की है।
मामले की सुनवाई और प्रभावितों के लिए कदम
यह मामला 31 दिसंबर को दो जनहित याचिकाओं के माध्यम से अदालत में आया था। पहली याचिका हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी ने दायर की थी, जबकि दूसरी याचिका पूर्व पार्षद महेश गर्ग और कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी की ओर से दाखिल की गई थी। इन याचिकाओं में प्रभावित परिवारों को मुफ्त इलाज और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था का अनुरोध किया गया था। अदालत ने 31 दिसंबर को इन मामलों की सुनवाई के दौरान नगर निगम को प्रभावित परिवारों का मुफ्त इलाज कराने और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। 2 जनवरी को इन आदेशों के पालन की स्थिति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।










