इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतें: एक गंभीर स्वास्थ्य संकट
पिछले सात से आठ वर्षों में इंदौर को अक्सर भारत का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता रहा है, लेकिन हाल के घटनाक्रम ने इस शहर की सफाई व्यवस्था की पोल खोल दी है। बीते दिनों भागीरथपुरा इलाके में गंदे और जहर जैसे पानी ने कई लोगों की जान ले ली, जिससे शहर की सफाई का दावा धूल धूसरित हो गया है। इस घटना ने न केवल शहर की छवि को धक्का पहुंचाया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि हम अपने ही घर में कितने असुरक्षित हो चुके हैं।
गंदे पानी से हुई मौतें और प्रशासन की लापरवाही
भागीरथपुरा में पानी की आपूर्ति में हुई लापरवाही के कारण कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है। यहां के घरों में लंबे समय से बदबूदार और गंदा पानी सप्लाई हो रहा था, जिसे कई बार शिकायत के बावजूद सुधार नहीं किया गया। इस पानी ने उल्टी, दस्त और बुखार जैसी बीमारियों को जन्म दिया, जो धीरे-धीरे जानलेवा साबित हुईं। अब तक दस से अधिक मौतें हो चुकी हैं, जिनमें 75 वर्षीय नंदलाल पाल और 50 वर्षीय सीमा प्रजापत जैसी जानी-मानी हस्तियों के साथ-साथ छह महीने के बच्चे की भी मौत हो चुकी है।
सामाजिक और सरकारी जवाबदेही की जरूरत
मृतकों की तस्वीरें और उनके परिवारों का दर्द इस बात का प्रमाण हैं कि लापरवाही का खामियाजा कितना भयंकर हो सकता है। जांच में पता चला है कि पाइपलाइन में लीकेज और सीवेज का पानी मिलना मुख्य कारण था। अधिकारियों ने पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए सैंपल भी भेजे हैं, लेकिन इससे पहले ही कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस घटना को गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। इस त्रासदी से सबक लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि शहर की सफाई व्यवस्था और जल सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।










