इंदौर के भागीरथपुरा में जल संकट और जानलेवा पानी का खतरा
इंदौर के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में प्रसिद्ध भागीरथपुरा क्षेत्र में जल प्रदूषण का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। यहां दूषित पानी के कारण पांच महीने के एक बच्चे की मौत हो गई है। उस मां ने सोचा था कि दूध में मिलाया गया पानी बच्चे को आसानी से पच जाएगा, लेकिन नगर निगम के नलों से आने वाला पानी ही उसके लिए जानलेवा साबित हुआ।
बच्चे की मौत और जल प्रदूषण का कारण
एक स्थानीय निवासी सुनील साहू ने बताया कि उनके बेटे अव्यान को कुछ दिनों से उल्टी और दस्त की शिकायत हुई थी। उन्हें तुरंत ही एक बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाया गया। पिता ने कहा, “डॉक्टर की सलाह पर हमने घर पर दवाइयां दीं। बाजार से दूध खरीदकर उसे देना शुरू किया, क्योंकि वह गाढ़ा था। फिर हमने नगर निगम के नल से आने वाले पानी में मिलाकर बच्चे को दिया।” लेकिन यह पानी ही उनके बच्चे के लिए जहर बन गया।
जल प्रदूषण से हुई मौतें और प्रभावित लोग
सरकारी अधिकारियों ने जानकारी दी है कि पिछले एक हफ्ते में भागीरथपुरा में उल्टी और दस्त की बीमारी से 1100 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें से करीब 150 को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि लीकेज के कारण नाले का गंदा पानी पाइपलाइन में मिल गया, जिससे यह महामारी फैली। अब तक कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक छह महीने का बच्चा भी शामिल है। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने इन मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि बीमार पड़ने के बाद एक हफ्ते में ही नौ लोगों की जान चली गई है।











