बिहार विधानसभा चुनाव का राजनीतिक प्रभाव और राज्यसभा चुनाव का समीकरण
बिहार विधानसभा चुनाव ने इस बार पूरी राजनीतिक दिशा ही बदल दी है, जिसका असर सिर्फ सरकार बनाने के खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि सूबे की सियासत पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने पांच सीटें जीतकर भले ही सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका न निभाई हो, लेकिन वे अब राज्यसभा चुनाव के असली किंगमेकर के रूप में उभरे हैं। बिना उनके समर्थन के न तो एनडीए (National Democratic Alliance) और न ही इंडिया ब्लॉक (India Bloc) जीत हासिल कर सकते हैं।
आगामी राज्यसभा चुनाव की तैयारियां और राजनीतिक समीकरण
अगले साल अप्रैल 2026 में बिहार की पांच राज्यसभा (Rajya Sabha) सीटें खाली हो रही हैं। इन सीटों के लिए मार्च 2026 तक चुनाव की संभावना है, और इसी को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों ने अभी से ही अपनी रणनीतियों बनाना शुरू कर दी हैं। विधानसभा सदस्यों की संख्या के आधार पर चार सीटें आसानी से सत्ताधारी एनडीए (NDA) जीत सकता है, लेकिन असली मुकाबला पांचवीं सीट के लिए है। इस सीट को लेकर राजनीतिक दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।
राज्यसभा सीटों पर चुनाव का गणित और ओवैसी की भूमिका
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए इस बार कम से कम 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं, जिनमें से वर्तमान में एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन के पास केवल 35 विधायक हैं। इसके अलावा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के पास पांच विधायक हैं। इस गणित से स्पष्ट है कि बीजेपी (BJP) और जेडीयू (JDU) दो-दो सीटें आराम से जीत सकते हैं। असली चुनौती पांचवीं सीट के लिए है, जिसमें सियासी संग्राम तेज हो सकता है।
एनडीए के पास 202 विधायक हैं, और चार सीटें जीतने के लिए उन्हें 164 वोटों की जरूरत होगी। यदि वे पांचवीं सीट भी जीतना चाहते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त तीन विधायकों का समर्थन चाहिए। दूसरी ओर, इंडिया ब्लॉक (India Bloc) के पास 35 विधायक, AIMIM (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) के पांच विधायक, बसपा (Bahujan Samaj Party) का एक विधायक और आईपी (IIP) का एक सदस्य है। इस तरह, ओवैसी की पार्टी किंगमेकर की भूमिका में आ गई है, और यदि उसे समर्थन मिल जाता है, तो उसकी जीत सुनिश्चित हो सकती है।
यदि एनडीए ओवैसी की पार्टी का समर्थन हासिल कर लेता है, तो वह आसानी से पांचवीं राज्यसभा सीट भी जीत जाएगा। वहीं, यदि विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक (India Bloc) समर्थन प्राप्त कर लेता है, तो जीत की संभावना और भी बढ़ जाती है। इस स्थिति में, इंडिया ब्लॉक के 35 विधायकों, ओवैसी के पांच विधायकों और बसपा के एक विधायक का समर्थन मिलकर पांचवीं सीट पर कब्जा किया जा सकता है। अब देखना यह है कि इस सियासी जंग में ओवैसी की पार्टी किसका साथ देगी-सत्ताधारी या विपक्षी दलों का।










