बिहार में बालिका शिक्षा का वर्तमान हाल
बिहार में बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 1994 में तत्कालीन वित्त मंत्री शंकर टेकरीवाल ने दो गर्ल्स हाई स्कूल की स्थापना की थी। इनमें से एक स्कूल पटना सिटी में स्थित है, जबकि दूसरा सहरसा के पूरब बाजार में मौजूद राजकीय कन्या उच्च विद्यालय है। इन दोनों स्कूलों की स्थापना को तीन दशक से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन सहरसा का यह विद्यालय अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।
सहरसा का राजकीय कन्या उच्च विद्यालय: चुनौतियों का सामना
सहरसा के इस विद्यालय में लगभग 1300 से 1400 छात्राएं नामांकित हैं, जो 9वीं से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई कर रही हैं। यहां कुल 10 सेक्शन संचालित हैं, लेकिन सुविधाओं का अभाव इस स्कूल की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। विद्यालय में केवल दो टीन शेड से बने कमरे हैं, जहां सभी छात्राओं को बैठाकर पढ़ाया जाता है। जगह की कमी के कारण कई छात्राओं को बैठने की भी जगह नहीं मिल पाती, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव और सुरक्षा की चिंता
स्कूल की सबसे बड़ी समस्या चहारदीवारी का न होना है। बाउंड्री न होने के कारण स्कूल परिसर में दिनभर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है, जिससे छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। छात्राओं ने बताया कि कई बार चापाकल लगवाया गया, लेकिन बाहर के लड़के उसे उखाड़ कर ले गए, जिससे पीने के पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। विभाग की ओर से दीवार खड़ी कर नल का प्वाइंट भी दिया गया है, लेकिन अभी तक उसमें नल नहीं लगाया गया है।
छात्राओं का कहना है कि पानी की कमी, बैठने की जगह का अभाव और असुरक्षित माहौल के कारण पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। 9वीं कक्षा की छात्रा फिनाश प्रवीण, कशिश कुमारी और 10वीं की छात्रा मुस्कान प्रवीण ने बताया कि बाउंड्री न होने से डर बना रहता है और पानी की व्यवस्था न होने से उन्हें काफी परेशानी होती है।
विद्यालय के प्राचार्य सुभाशीष झा ने बताया कि भवन और चहारदीवारी के लिए विभाग को कई बार पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। स्कूल में चार ग्रेड के नौ स्वीकृत पद हैं, लेकिन कोई कर्मचारी कार्यरत नहीं है। शिक्षक खुद सफाई और अन्य कार्य करते हैं। बाउंड्री के अभाव में रोज असामाजिक तत्वों का सामना करना पड़ता है और सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है।










