मध्य प्रदेश में थैलेसीमिया के इलाज के दौरान बच्चों में HIV संक्रमण की घटना
मध्य प्रदेश में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के उपचार के दौरान छह बच्चों में HIV संक्रमण की पुष्टि होना सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटना को लेकर राजनीतिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है।
बच्चों में HIV संक्रमण के पीछे खून की गुणवत्ता और जांच प्रक्रिया की खामियां
सतना, जबलपुर और अन्य जिला अस्पतालों में संदिग्ध खून चढ़ाने के बाद 12 से 15 वर्ष के छह बच्चों में HIV पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें से एक बच्चे के माता-पिता भी संक्रमित पाए गए हैं। ये मामले इस वर्ष जनवरी से मई के बीच सामने आए हैं। कांग्रेस के नेता और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर अपराध है। उन्होंने आरोप लगाया कि खून की जांच में लापरवाही और प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है, जिससे सिस्टम की पूरी तरह से विफलता स्पष्ट होती है।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी और आवश्यक कार्रवाई
नेता ने आगे कहा कि स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला को इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। साथ ही सतना के ब्लड बैंक इंचार्ज और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को निलंबित किया जाना चाहिए। भूरिया ने आरोप लगाया कि प्रभावित बच्चे कई महीनों से HIV पॉजिटिव पाए गए थे, लेकिन सरकार ने इस मुद्दे को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इन बच्चों का जीवन भर मुफ्त इलाज और मुआवजा मिलना चाहिए। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि सरकार की असंवेदनशीलता का परिणाम है कि अस्पताल सुरक्षित नहीं रहे हैं, और इस मामले में आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, सभी ब्लड बैंकों का राज्य स्तरीय ऑडिट कराना आवश्यक है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो छह दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।











