मध्य प्रदेश बना देश का पहला नक्सल मुक्त राज्य
मध्य प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश का पहला नक्सल मुक्त राज्य घोषित किया है, यह घोषणा खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की है। यह सफलता निर्धारित समय से पहले ही प्राप्त हो गई है, जो प्रदेश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक बड़ा कदम है।
बालाघाट में नक्सलियों का अंतिम सरेंडर
11 दिसंबर को बालाघाट जिले में नक्सल प्रभावित क्षेत्र में दो अंतिम नक्सली आत्मसमर्पण कर गए। दीपक उइके और रोहित ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की वर्चुअल उपस्थिति में अपने हथियार surrender किए। इस घटना के साथ ही मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश को पूरी तरह से नक्सलमुक्त घोषित कर दिया। यह भी उल्लेखनीय है कि यह उपलब्धि दो दिन पहले ही, जब मुख्यमंत्री के दो साल पूरे हो रहे थे, हासिल हुई।
मध्य प्रदेश की नक्सल विरोधी यात्रा और ऐतिहासिक घटनाएं
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 26 जनवरी को सूबे को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन यह लक्ष्य उससे भी पहले ही प्राप्त हो गया। दो साल के शासनकाल में यह सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी 2026 तक देश को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, और मध्य प्रदेश ने इस दिशा में पहले ही कदम बढ़ा दिए हैं। पिछले 42 दिनों में MMC (माओवादी प्रभावित क्षेत्र) में 42 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। राज्य की पुलिस ने 2025 तक 13 नक्सलियों को सरेंडर कराया है, जबकि 10 एनकाउंटर में मारे गए हैं। बालाघाट, डिंडोरी और मंडला जैसे जिले पूरी तरह नक्सलमुक्त हो चुके हैं।
बालाघाट क्षेत्र की सीमा महाराष्ट्र के गोंदिया और छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव से लगती है, और यह इलाका माओवादी हिंसा से बहुत प्रभावित रहा है। मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र की एक दुखद घटना का भी जिक्र किया, जब 1999 में नक्सलियों ने मंत्री लखीराम कावरे को घर से बाहर निकाला और बेरहमी से हत्या कर दी। यह घटना उस समय की है जब दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।
छत्तीसगढ़ में 2013 में सुकमा में हुई नक्सली हिंसा भी एक कड़वी याद है। उस दिन कांग्रेस की परिवर्तन रैली पर नक्सलियों ने हमला किया, जिसमें कई नेताओं और पुलिसकर्मियों की जान गई। इस हमले में कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा समेत 30 से अधिक लोग मारे गए थे। इस घटना ने नक्सल समस्या की गंभीरता को फिर से उजागर किया।
सरेंडर कर चुके नक्सली भूपति ने अपने पुराने साथियों से मुख्यधारा में लौटने और समाज की सेवा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संघर्ष छोड़कर वे अब संविधान के तहत लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। यह कदम नक्सल हिंसा के अंत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।











