मध्यप्रदेश के मल्हारगढ़ थाने का विवादास्पद मामला
मध्यप्रदेश के मल्हारगढ़ पुलिस थाने ने एक बार फिर सुर्खियों में जगह बना ली है, लेकिन इस बार उसकी छवि धूमिल हुई है। कुछ ही समय पहले इस थाने को केंद्रीय गृह मंत्री ने देश के टॉप 10 पुलिस थानों में स्थान दिया था, लेकिन अब इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस थाने के छह पुलिसकर्मियों को गलत कार्रवाई के आरोप में निलंबित कर दिया गया है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
मामला उस समय और भी जटिल हो गया जब हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को खारिज कर दिया। 29 अगस्त 2025 को मल्हारगढ़ पुलिस ने 18 वर्षीय युवक सोहनलाल पर 2 किलो 714 ग्राम अफीम रखने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार किया था। लेकिन परिवार ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर दावा किया कि युवक को बस से सुबह 11:30 बजे उठाया गया था, जबकि पुलिस ने गिरफ्तारी शाम 5 बजे दिखाई। इस असमानता ने कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए।
सस्पेंड किए गए पुलिसकर्मियों और पुलिस की छवि पर प्रभाव
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद मंदसौर के एसपी विनोद कुमार मीना ने बताया कि इस मामले में छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें मल्हारगढ़ थाने के टीआई राजेंद्र पवार, एसआई संजय प्रताप सिंह, एसआई सादिक मंसूरी, कांस्टेबल नरेंद्र, जितेंद्र और दिलीप शामिल हैं। इन पर गलत कार्रवाई का आरोप है। उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिन पहले इस थाने को देश के गृहमंत्री अमित शाह ने देश के टॉप 10 पुलिस थानों में नौवें स्थान पर रखा था। उस समय इसकी प्रशंसा में कई मानदंडों का उल्लेख किया गया था, जैसे अपराधों का त्वरित निपटारा, शिकायतों का समाधान और कानून व्यवस्था का मजबूत होना। लेकिन अब इस विवाद ने इस पुलिस स्टेशन की प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचाया है, और इसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।











