मार्गशीर्ष पूर्णिमा का धार्मिक महत्व और शुभ अवसर
सनातन परंपरा में मार्गशीर्ष पूर्णिमा को अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ था, जो त्रिदेव-ब्रह्मा, विष्णु और महेश-के संयुक्त अवतार हैं। इस तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है, और इसे पुण्यदायक माना जाता है।
यह पर्व 4 दिसंबर सुबह 8:37 बजे से शुरू होकर 5 दिसंबर सुबह 4:43 बजे समाप्त होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन जयंती व्रत रखा जाता है और पूजा का शुभ समय भी इसी दिन निर्धारित किया गया है।
दत्तात्रेय जयंती के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
2025 में दत्तात्रेय जयंती के लिए प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:14 से 6:06 बजे, गोधूलि मुहूर्त शाम 5:58 से 6:24 बजे, और अमृत काल दोपहर 12:20 से 1:58 बजे तक। इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा।
भगवान दत्तात्रेय का स्वरूप त्रिदेव-ब्रह्मा, विष्णु और शिव-का संयुक्त रूप है। उनकी शिक्षाएं सरल जीवन, संयम, ध्यान और आत्मज्ञान का संदेश देती हैं। पुराणों में उनके 24 गुरुओं का भी उल्लेख है, जिन्होंने जीवन जीने की महत्वपूर्ण सीखें दीं। भक्त मानते हैं कि उनकी कृपा से मानसिक शांति, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है।
दत्तात्रेय जयंती का आयोजन और सामाजिक सेवा
इस पावन दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा करने से त्रिदेव की पूजा का पुण्य फल प्राप्त होता है। भक्त व्रत रखते हैं, मंत्र जप करते हैं और भगवान की प्रतिमा या चित्र पर दूध, पंचामृत, इत्र और फूल अर्पित करते हैं।
देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा, कीर्तन और भजन संध्या का आयोजन किया जाता है। कई धार्मिक संस्थाएं गरीबों को भोजन, वस्त्र और सहायता प्रदान करने के लिए सेवा कार्य भी करती हैं। स्थानीय प्रशासन भी सुरक्षा और व्यवस्था का ध्यान रखता है, ताकि भक्त आसानी से पूजा-अर्चना कर सकें और इस पवित्र अवसर का पूरा लाभ उठा सकें।











