मध्य प्रदेश में बाल विवाह की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय
मध्य प्रदेश में सरकार लड़कियों के सशक्तिकरण के लिए ‘लाड़ली लक्ष्मी’ जैसी योजनाओं को सफलता की मिसाल मानती है, लेकिन वहीं दूसरी ओर बाल विवाह के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि चिंता का कारण बन गई है। यह खुलासा विधानसभा में प्रस्तुत किए गए लिखित जवाब में हुआ, जिसमें महिला एवं बाल विकास विभाग ने कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह द्वारा पूछे गए सवाल का विस्तृत विवरण दिया है।
बाल विवाह के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि
विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में विभाग ने बताया कि 2020 से 2025 के बीच प्रदेश में बाल विवाह के मामलों में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज हुई है। मार्च 2020 से अब तक कुल 2916 बाल विवाह के मामले दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2020 में 366 मामले सामने आए, जो 2021 में बढ़कर 436 हो गए। 2022 में यह संख्या 519 पहुंची, और 2023 में 528 मामले दर्ज हुए। 2024 में यह आंकड़ा 529 तक पहुंच गया, और अभी तक 2025 में 538 मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि वर्ष समाप्त होने में अभी एक महीना बाकी है।
जिलेवार आंकड़ों में विशेष रूप से प्रभावित जिले
सरकार द्वारा जारी जिलेवार डेटा से पता चलता है कि कोरोना महामारी के बाद से बाल विवाह के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, जो चिंता का विषय है। खासतौर पर राजगढ़, गुना, देवास, रतलाम और छतरपुर जैसे जिले इन मामलों से सबसे अधिक प्रभावित हैं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि बाल विवाह को रोकने के लिए और अधिक प्रभावी, कठोर और व्यापक कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि इस सामाजिक बुराई पर नियंत्रण पाया जा सके।









