बिहार में सरकारी बंगलों का विवाद और राजनीतिक तनाव
बिहार में नई सरकार के गठन के साथ ही राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (Rabri Devi) को 10 सर्कुलर रोड पर स्थित सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया है। इसके बदले में, सरकार ने राबड़ी देवी को पटना के हार्डिंग रोड पर एक नया बंगला आवंटित किया है।
हालांकि, लालू परिवार इस पुराने बंगले को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मगनी लाल मंडल ने इसे राजनीतिक बदले का कदम बताते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वे बंगला खाली नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आवश्यक हुआ तो वे इस मामले को अदालत तक ले जाएंगे।
लालू परिवार क्यों नहीं छोड़ना चाहता पुराना बंगला?
सवाल उठता है कि आखिर क्यों लालू परिवार 10 सर्कुलर रोड का बंगला छोड़ने को तैयार नहीं है। क्या नया बंगला पुराने आवास से छोटा है या फिर इसमें कोई और कारण है? राबड़ी देवी पुराने बंगले में ही क्यों रहना चाहती हैं, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
दरअसल, राबड़ी देवी को यह बंगला उनके नेता प्रतिपक्ष होने के नाते मिला था, जो अब उन्हें नहीं मिल रहा है। सरकार का तर्क है कि हाईकोर्ट ने 2019 में पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली सुविधाओं को समाप्त कर दिया है। इसके बाद, उन्हें पटना के हार्डिंग रोड पर नया बंगला आवंटित किया गया है, जो विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के पद के कारण मिला है।
क्या है नए बंगले का महत्व और भविष्य?
राबड़ी देवी को यह नया बंगला विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आवंटित किया गया है, जिसमें छह बेडरूम, ड्राइंग रूम, डाइनिंग हॉल और एक बड़ा गार्डन शामिल है। यह बंगला बिहार के मंत्रियों के आवासों में दूसरा सबसे बड़ा माना जाता है।
हालांकि, यदि राबड़ी देवी नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ती हैं, तो उन्हें यह बंगला भी छोड़ना पड़ेगा। वर्तमान में, विधान परिषद में आरजेडी के 13 सदस्य हैं, जिनमें से कुछ का कार्यकाल 2026, 2028 और 2030 में समाप्त हो रहा है। यदि इन सीटों पर पार्टी का वर्चस्व कम हो जाता है, तो राबड़ी देवी का नेता प्रतिपक्ष का पद भी खतरे में पड़ सकता है।
वर्तमान राजनीतिक समीकरण और विधान परिषद की सीटें घटने के साथ ही, राबड़ी देवी का यह बंगला और नेता प्रतिपक्ष का पद दोनों ही खतरे में हैं। पार्टी का मानना है कि यह सब राजनीतिक साजिश का हिस्सा है, और वे कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बना चुके हैं।










