भारत-पाकिस्तान संबंधों और सुरक्षा चुनौतियों पर विदेश मंत्री का बयान
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को पाकिस्तान के रक्षा प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ बातचीत के दौरान कहा कि जैसे अच्छे और बुरे आतंकवादी होते हैं, वैसे ही अच्छे और नहीं होते हैं सैन्य नेता भी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के लिए पाकिस्तान की सेना की वास्तविकता सदैव से यही रही है, और अधिकांश समस्याएँ वहीं से उत्पन्न होती हैं।
पाकिस्तान की स्थिति और भारत की रणनीति
कूटनीतिक रूप से फंसे रहने के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि हमें पाकिस्तान की स्थिति, उसकी क्षमताओं, उसकी प्रतिष्ठा और अंतरों पर ध्यान देना चाहिए। हमें अत्यधिक जुनून में आकर खुद को सीमित नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दे हैं जिन पर हम काम करेंगे, और इनसे निपटने के लिए तैयार हैं।
ऑपरेशन सिंदूर और भारत की जिम्मेदारी
जब पूछा गया कि क्या ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत कुछ अलग कर सकता था, तो जयशंकर ने जवाब दिया कि हमारे देश के लिए कुछ नियम और मानदंड हैं जिनका पालन जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत में कदम उठाते समय हम जवाबदेह होते हैं-लोगों, मीडिया और नागरिक समाज के प्रति। यह बातें आसान लग सकती हैं, लेकिन इनका पालन जरूरी है।
रूस-भारत संबंध और विदेश नीति का महत्व
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिल्ली यात्रा पर बोलते हुए, जयशंकर ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश के लिए मजबूत संबंध बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमारे जैसे देश के लिए, जो उभर रहा है और अपनी भूमिका का विस्तार कर रहा है, यह जरूरी है कि हमारे संबंध स्थिर और अच्छे स्तर पर रहें। हम अधिक से अधिक देशों के साथ सहयोग बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं, और अपनी पसंद चुनने की स्वतंत्रता भी रखते हैं। यही हमारी विदेश नीति का मूल आधार है।
पुतिन की यात्रा और अमेरिका के साथ संबंध
जब पूछा गया कि क्या पुतिन की भारत यात्रा अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता को जटिल बना सकती है, तो जयशंकर ने स्पष्ट किया कि मैं इससे असहमत हूं। भारत के पास विश्व के सभी प्रमुख देशों के साथ संबंध हैं। किसी भी देश के लिए यह उचित नहीं है कि वह अपने संबंधों को वीटो या अधिकार के आधार पर नियंत्रित करे। भारत अपने संबंध स्वतंत्र रूप से विकसित करता है, और यह उसकी विदेश नीति का मजबूत आधार है।











