तुर्की का पाकिस्तान को हथियारों का समर्थन और नई सैन्य परियोजनाएं
तुर्की अपने मिलगेम (MILGEM) युद्ध पोत परियोजना के तहत पाकिस्तान को अत्याधुनिक युद्धपोत सौंप रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत तुर्की में बनाए गए पाकिस्तानी नौसेना के युद्धपोतों का सफलतापूर्वक लाइव फायर परीक्षण पूरा हो चुका है। इन परीक्षणों में उच्च तकनीकी क्षमता, सिस्टम का समेकन और संचालन की विश्वसनीयता का प्रदर्शन किया गया है। यह युद्धपोत विशेष रूप से पाकिस्तान के लिए डिजाइन किए गए हैं, और तुर्की इस परियोजना के माध्यम से पाकिस्तान को चार युद्धपोत प्रदान कर रहा है। इनमें से दूसरा युद्धपोत पीएनएस खेबर ने हाल ही में समुद्र से जमीन पर लक्ष्य भेदने में सटीक निशाना साधा है।
पाकिस्तान-तुर्की सैन्य सहयोग और युद्धपोत निर्माण
2018 में पाकिस्तान ने तुर्की के साथ मिलकर मिलगेम श्रेणी के चार युद्धपोत बनाने का समझौता किया था। इस समझौते के अनुसार, दो युद्धपोत तुर्की में ही बनाए जाने थे, जबकि शेष दो पाकिस्तान में बनाए जा रहे हैं। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने इन युद्धपोतों की प्रशंसा करते हुए इन्हें तुर्की के लिए गर्व का स्रोत बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि सितंबर 2018 में हमने पाकिस्तान की नौसेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इन जहाजों का निर्माण अनुबंध किया था। पहला जहाज पीएनएस बाबर को 24 मई 2024 को पाकिस्तान को सौंप दिया गया है, और अब पीएनएस हेबर की डिलीवरी भी पूरी कर ली गई है, जिसने सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं।
तुर्की-पाकिस्तान सैन्य संबंध और क्षेत्रीय प्रभाव
तुर्की और पाकिस्तान के बीच मजबूत सैन्य और आर्थिक सहयोग जारी है। तुर्की ने पाकिस्तान को न केवल युद्धपोत बल्कि 30 ATAK हमलावर हेलीकॉप्टर भी प्रदान किए हैं। जम्मू और कश्मीर के मुद्दे पर तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने पाकिस्तान का समर्थन किया है, और क्षेत्र में पाकिस्तान के अवैध कब्जे के बावजूद इस्लामाबाद का साथ निभाया है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद और भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया है। यह सैन्य सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता और भारत के खिलाफ रणनीतिक बढ़त का संकेत है।











