इजरायली संसद में ट्रंप का भाषण और प्रदर्शनकारियों का विरोध
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का इजरायली संसद (नेसेट) में दिया गया भाषण उस समय बाधित हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने कुछ देर के लिए हंगामा किया। इस दौरान, नेसेट के दो सदस्य ओफ़र कासिफ और आयमन ओदेह को तुरंत ही सदन से बाहर निकाल दिया गया। इन दोनों ने एक छोटे से बोर्ड पर नरसंहार का उल्लेख किया था, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। सुरक्षा कर्मियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए इन प्रदर्शनकारियों को बाहर निकाला, जबकि ट्रंप मंच पर खड़े होकर इस घटना को देख रहे थे। जब उन्हें बाहर किया जा रहा था, तो नेसेट के अन्य सदस्य ट्रंप के समर्थन में “ट्रंप! ट्रंप! ट्रंप!” के नारे लगा रहे थे।
प्रदर्शनकारियों का विरोध और ट्रंप की प्रतिक्रिया
प्रदर्शनकारियों को हटाने की प्रक्रिया को लेकर ट्रंप ने कहा कि यह बहुत प्रभावी था। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ओफ़र कासिफ ने लिखा कि इस संसद में दिख रहे पाखंड को देखकर वह हैरान हैं। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू को ऐसी चापलूसी के जरिए ताज पहनाने का यह तरीका पहले कभी नहीं देखा गया। यह न केवल गाजा में मानवता के खिलाफ अपराधों को छुपाने का प्रयास है, बल्कि हज़ारों फिलिस्तीनी और इज़राइली पीड़ितों के खून को भी नजरअंदाज करता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह केवल युद्धविराम और व्यापक समझौते के कारण इस समर्थन में हैं।
नेसेट में विरोध और राजनीतिक संदेश
ओफ़र कासिफ ने कहा कि यह तख्ती उन्होंने अपने मित्र आयमन ओदेह के साथ मिलकर बनाई थी। उनका उद्देश्य अशांति फैलाना नहीं, बल्कि न्याय की मांग करना था। उनका मानना है कि सच्ची शांति तभी आएगी जब कब्जे और रंगभेद का अंत होगा और इज़राइल के साथ एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि कब्ज़ा करने वाले बनने से इनकार करो और खून-खराबे वाली सरकार का विरोध करो। इस घटना के दौरान ट्रंप का भाषण भी विरोध के बीच हुआ, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने “सोयकिरिम” (Genocide) लिखी हुई तख्तियां दिखाईं।











